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कर्नाटक के पुलिस स्टेशनों पर है कांग्रेस के नेताओं का दबाव : भाजपा

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बेंगलुरु, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राज्यभर के पुलिस स्टेशन कांग्रेस स्टेशन बन गए हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करके उन्हें निशाना बनाने का आरोप भी लगाया।

एनडीए के दूसरे नेताओं के साथ गवर्नर थावरचंद गहलोत से मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए भाजपा नेता अशोक ने कहा कि उन्होंने यह मामला गवर्नर के ध्यान में लाया है और सरकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अशोक ने आरोप लगाया कि बिना किसी आधार के भाजपा और जेडी(एस) कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं ने सोमवार को चुनाव आयोग से भी मुलाकात की थी और फॉर्म-7 आवेदनों पर स्पष्टीकरण मांगा था। कोई भी फॉर्म-7 जमा कर सकता है और वे जितने चाहें उतने फॉर्म जमा कर सकते हैं, कानून यही है। जब हमने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या उन्होंने पुलिस से मामले दर्ज करने को कहा है, तो उन्होंने साफ किया कि आयोग ने किसी से ऐसा करने के लिए नहीं कहा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि जयनगर के भाजपा विधायक के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई है और दावा किया कि पूरे राज्य में आपराधिक मामलों के जरिए भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इससे कांग्रेस की गुंडा संस्कृति का पता चलता है।

अशोक ने कहा कि भाजपा और एनडीए मजबूत हो रहे हैं जो कि कांग्रेस बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि इसीलिए हमारे कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है। हमने इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए गवर्नर से मुलाकात की।

इस बीच, कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार उन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके लोगों में डर पैदा कर रही है जिन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए हैं।

गवर्नर से मिलने के बाद नारायणस्वामी ने कहा कि भाजपा और जेडी(एस) के नेताओं और चुने हुए प्रतिनिधियों ने सोमवार को मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात की थी और फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर फैली कथित उलझन पर सफाई मांगी थी।

उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस मामले पर सफाई दे दी है। अगर फॉर्म-7 से जुड़ा कोई मामला है, तो यह चुनाव आयोग और जनता के बीच का मुद्दा है। इसका राज्य सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। नारायणस्वामी ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसी वोटर का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया कि फॉर्म-7 का आवेदन जमा किया गया था।

उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 जमा होने के बाद, एक भी नाम नहीं हटाया गया है। अगर कोई फैसला लेना होगा, तो चुनाव आयोग आवेदनों की जांच करेगा। अगर दस्तावेज सही पाए गए, तो नाम बना रहेगा, वरना आवेदन खारिज कर दिया जाएगा।