बेंगलुरु, 18 मार्च (आईएएनएस)। पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो मामले में जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को 13,712 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी। इस मामले में कुल 39 आरोपियों को नामजद किया गया है।
यह चार्जशीट हासन की वरिष्ठ सिविल अदालत में दायर की गई है। एसआईटी के अनुसार जांच के दौरान कुल 52 लोगों के नाम सामने आए थे, लेकिन पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर 39 के खिलाफ ही आरोप तय किए गए हैं। आरोपियों में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कुछ कार्यकर्ता भी शामिल हैं।
यह जांच 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान जेडी(एस) के एजेंट रहे अधिवक्ता पूर्णचंद्र द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी।
एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में बताया कि आरोपियों ने हासन में करीब 70 पेन ड्राइव खरीदे थे, जिनके जरिए कथित अश्लील वीडियो फैलाए गए। जांच के दौरान 277 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
अधिकारियों के मुताबिक, आरोप तकनीकी साक्ष्यों और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट के आधार पर तय किए गए हैं।
चार्जशीट में आरोपी नंबर-1 नवीन, आरोपी नंबर-2 कार्तिक एन (जो प्रज्वल रेवन्ना के ड्राइवर थे), आरोपी नंबर-3 चेतन बी.सी., आरोपी नंबर-4 चेतन वाई.एस., आरोपी नंबर-5 लीकिथ गौड़ा, आरोपी नंबर-6 देवराजेगौड़ा सहित अन्य के नाम शामिल हैं।
एसआईटी के अनुसार, ये वीडियो कथित तौर पर महिलाओं की सहमति के बिना मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए और बाद में पेन ड्राइव और मोबाइल के जरिए प्रसारित किए गए। कुछ आरोपियों ने इन्हें अपने फोन से दूसरों के साथ साझा किया, जिससे लोकसभा चुनाव के दौरान ये वीडियो तेजी से फैले।
गौरतलब है कि प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के चार अलग-अलग मामले दर्ज हैं, जिनकी जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। यह मामला तब सामने आया था जब 26 अप्रैल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हासन में कथित रूप से अश्लील वीडियो से भरे पेन ड्राइव बांटे गए थे।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पहले ही इस मामले में दोषी ठहराए गए प्रज्वल रेवन्ना की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता, लंबित मामलों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को आधार बनाया था।
प्रज्वल रेवन्ना, जिन्हें मई 2024 में जर्मनी से लौटने के बाद गिरफ्तार किया गया था, ने अदालत के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने पीड़िता के बयान में कथित विरोधाभास और सबूतों में असंगतियों का हवाला दिया है।
विशेष अदालत ने चार में से एक मामले में उन्हें उम्रभर की कैद की सजा सुनाई है और जुर्माना भी लगाया है।

