सोल, 3 अगस्त (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोल में नई अमेरिकी राजदूत मिशेल स्टील, वॉशिंगटन तक अपनी ‘सीधी पहुंच’ का उपयोग करते हुए दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
योनहाप न्यूज टीवी को दिए इंटरव्यू में चो ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत होगी। कहा जाता है कि राजदूत की वॉशिंगटन तक सीधी पहुंच है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि हम इसका इस्तेमाल दोनों देशों के रिश्तों में मौजूद कठिन मुद्दों को सुलझाने के लिए कर सकेंगे।”
योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, मिशेल स्टील गुरुवार को दक्षिण कोरिया पहुंचीं और उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया। यह पद पिछले साल जनवरी से खाली पड़ा हुआ था।
चो ह्यून मंगलवार को स्टील से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने वाले हैं, जब वह विदेश मंत्रालय को अपने नियुक्ति पत्रों की प्रति सौंपेंगी।
स्टील का आगमन ऐसे समय में हुआ है, जब सोल और वॉशिंगटन के बीच सुरक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं। इनमें अमेरिका में दक्षिण कोरिया के निवेश संबंधी वादे और अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी कूपांग इंक के खिलाफ सोल की नियामक कार्रवाई को लेकर पैदा हुआ तनाव भी शामिल है। यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर डेटा लीक के बाद की गई थी।
इसके अलावा, चो ने कहा कि उन्हें पता है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ‘जल्द ही’ साउथ कोरिया जाएंगे। उनकी अप्रैल में हुई उत्तर कोरिया की यात्रा पर चर्चा होने की उम्मीद है।
कोरिया नेशनल डिप्लोमैटिक अकादमी में हाल ही में हुए डेटा लीक के बारे में, जिसमें दक्षिण कोरिया के लगभग सभी राजनयिकों की निजी जानकारी उजागर होने की आशंका है, चो ने कहा कि विदेश मंत्रालय कड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है। इनमें भविष्य में हैकिंग रोकने के लिए मजबूत फायरवॉल तैयार करना भी शामिल है।
पिछले महीने दक्षिण कोरिया की अमेरिका में राजदूत कांग क्यूंग-वा ने मिशेल स्टील से मुलाकात के दौरान उनसे दोनों देशों के गठबंधन को एक ‘नई ऊंचाई’ तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया था।
कांग और स्टील की मुलाकात 21 जुलाई को हुई थी, जब स्टील सोल के लिए रवाना होने वाली थीं। स्टील 30 जुलाई (कोरिया समयानुसार) को सोल पहुंचीं। उस समय दोनों देशों के सामने कई साझा जिम्मेदारियां थीं, जिनमें पिछले वर्ष हुए सुरक्षा, व्यापार और निवेश संबंधी द्विपक्षीय समझौतों को लागू करना भी शामिल है।

