सूरत, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। सूरत जिले के कोसमादा में 125 करोड़ रुपए की लागत से इस्कॉन मंदिर का निर्माण किया जाएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रविवार को इसकी आधारशिला रखी और धार्मिक संस्थानों से आध्यात्मिक शिक्षाओं को मानव सेवा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया।
पटेल ने आधारशिला की पूजा की और नरसिंह यज्ञ में आहुति दी। प्रस्तावित मंदिर के लिए दान देने वाले दाताओं को सम्मानित करने के लिए एक अभिनंदन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
कृषि मंत्री जीतू वाघाणी, स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया और राज्यसभा सांसद गोविंद ढोलकिया की उपस्थिति में सभा को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विरासत भी, विकास भी’ के दृष्टिकोण के अनुरूप, विकास के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाती है।
उन्होंने राम मंदिर के निर्माण सहित देश की धार्मिक विरासत के संरक्षण और पुनरुद्धार के प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि आध्यात्मिक कार्य में योगदान देने का अवसर सौभाग्य की बात है।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रयासों से समाज में सद्भाव को बढ़ावा मिल सकता है।
श्रीमद् भगवद् गीता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके 18 अध्याय रोजमर्रा की जिंदगी की दुविधाओं और चुनौतियों से निपटने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि अर्जुन विषाद योग, पहले अध्याय से लेकर मोक्ष संन्यास योग, अंतिम अध्याय तक, यह शास्त्र लोगों को भ्रम से ज्ञान की ओर, निराशा से आत्मविश्वास की ओर, और निष्क्रियता से कर्तव्यबोध की ओर मार्गदर्शन करता है।
पटेल ने समझाया कि सांख्य योग आत्मज्ञान, स्थिर बुद्धि और कर्तव्य पर बल देता है, जबकि कर्म योग आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में निस्वार्थ कर्म के महत्व को सिखाता है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान कर्म संन्यास योग बताता है कि कैसे ज्ञान कर्म को पवित्र बना सकता है। इन मूल्यों को दैनिक जीवन में शामिल करने से परिवार मजबूत होंगे, सामाजिक सद्भाव बढ़ेगा और देश के विकास के लिए एक नैतिक आधार मिलेगा।
मंदिर परियोजना को आध्यात्मिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ लाने का अवसर बताते हुए पटेल ने लोगों से आग्रह किया कि वे भक्ति को केवल पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे मानवता की सेवा से जोड़ें।
उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने और उनकी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की ओर निर्देशित करने का भी आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह मंदिर आध्यात्मिक शिक्षा, युवा सशक्तिकरण, सांस्कृतिक जागरूकता और मानवीय सेवा के केंद्र के रूप में विकसित होगा।
इससे पहले, इस्कॉन वराछा के अध्यक्ष मूर्तिमान दास ने भाषण दिया और प्रस्तावित मंदिर की विकास योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री पटेल ने परियोजना में योगदान देने वाले समाज के प्रमुख सदस्यों और दानदाताओं को सम्मानित किया। एशिया भर में आयोजित श्रीमद् भगवद् गीता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को भी सम्मानित किया गया।
