Sunday, August 16, 2026
SGSU Advertisement
Home अपराध साइबर अपराधों को लेकर तमिलनाडु सरकार का बड़ा प्लान, चेन्नई में बनाया...

साइबर अपराधों को लेकर तमिलनाडु सरकार का बड़ा प्लान, चेन्नई में बनाया राज्य-स्तरीय कमांड सेंटर

0
3

चेन्नई, 16 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने बढ़ते और जटिल साइबर अपराधों से निपटने के लिए चेन्नई में साइबर क्राइम विंग के हेडक्वार्टर को राज्य-स्तरीय कमांड सेंटर में बदला है।

राज्य सरकार ने इसे ‘तमिलनाडु राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (टीएन-एस4सी) नाम दिया है। यह सेंटर अशोक नगर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कॉम्प्लेक्स से काम करेगा।

गृह विभाग ने 28 जुलाई को सरकारी आदेश जारी किया और 12 अगस्त को तमिलनाडु सरकार के गजट में इसकी सूचना प्रकाशित की गई। टीएन-एस4सी, ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ के लिए राज्य की नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगा। यह राज्य के डीजीपी की देखरेख में और साइबर अपराध शाखा के प्रमुख या एडिशनल डीजीपी के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में काम करेगा।

इसे चौबीसों घंटे काम करने वाले हब के तौर पर बनाया गया है। यह सेंटर ऑनलाइन आपराधिक धोखाधड़ी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने, साइबर खतरों पर नजर रखने और साइबर पेट्रोलिंग करने का काम करेगा।

यह कमांड सेंटर बैंकों, दूरसंचार ऑपरेटरों, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, सीईआरटी-इन और केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा। यह सेंटर अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय समन्वय की जरूरत वाले मामलों को भी संभालेगा, जिनमें संगठित साइबर अपराध, रैंसमवेयर हमले, क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित अपराध और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी शामिल हैं।

इसके संचालन को छह विभागों में विभाजित किया जाएगा, जिनमें राज्य साइबर कमांड सेंटर, राज्य साइबर अपराध जांच केंद्र, साइबर अरंगम, उन्नत साइबर फोरेंसिक इकाई, प्रशासन प्रभाग और साइबर सुरक्षा प्रभाग शामिल हैं।

कमांड सेंटर 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन का संचालन करेगा, ई-जीरो एफआईआर की निगरानी करेगा और सिम कार्ड, मोबाइल डिवाइस और गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने में तालमेल बिठाएगा। यह सोशल मीडिया इंटेलिजेंस और डार्क वेब निगरानी भी करेगा। जांच केंद्र कई अधिकार क्षेत्रों में फैले तकनीकी रूप से परिष्कृत अपराधों की जांच करेगा। यह 1 लाख रुपए से अधिक के वित्तीय नुकसान वाले मामलों में ई-जीरो एफआईआर के लिए ई-पुलिस स्टेशन के रूप में कार्य करेगा।

सरकार ने मुख्य कमांड और जांच इकाइयों के लिए 172 पुलिस पदों को मंजूरी दी है। साइबर अरंगम में 28 अन्य कर्मियों को तैनात किया जाएगा, जबकि 25 मंत्रालयी कर्मचारी प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करेंगे।

साइबर अरंगम जन जागरूकता कार्यक्रम, पुलिस प्रशिक्षण, छात्र इंटर्नशिप, हैकथॉन और डिजिटल साक्षरता पहल का संचालन करेगा। फोरेंसिक इकाई राज्य की साइबर प्रयोगशाला का प्रबंधन करेगी और उन्नत जांच प्रौद्योगिकियों को लागू करेगी।

डार्क वेब जांच, मैलवेयर विश्लेषण, खतरे की खुफिया जानकारी और डिजिटल फोरेंसिक समेत विशेष क्षेत्रों में छह बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।

सरकार ने 1930 हेल्पलाइन के विस्तार के लिए 8.88 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिसमें तीन साल के लिए 15 आउटसोर्स सीटें शामिल होंगी। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड शिकायतों, गिरफ्तारियों, बरामदगी, जब्ती और दोषसिद्धि की निगरानी करेगा, जबकि केंद्र के प्रदर्शन की मासिक और त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी।