Monday, August 24, 2026
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तनुश्री दत्ता का ‘वेटरन’ शब्द पर निशाना, कहा- ‘उम्र देखकर भरोसा नहीं, चरित्र के हिसाब से सम्मान दें’

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मुंबई, 24 अगस्त (आईएएनएस)। ‘आशिक बनाया आपने’ और ‘ढोल’ जैसी फिल्मों में दिख चुकीं अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने बॉलीवुड में उम्र और वरिष्ठता को लेकर एक बार फिर बेबाक राय रखी है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि वह उम्र में बड़ा है या फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से काम कर रहा है।

अपने अनुभवों को याद करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि उन्होंने जिंदगी और करियर से यह सीख ली है कि किसी इंसान की पहचान उसकी उम्र से नहीं, बल्कि उसके चरित्र से होनी चाहिए।

सोमवार को तनुश्री दत्ता ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में अपने सफर और इस दौरान मिली सीख के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, ”मुझे भी यही लगा था कि उम्रदराज एक्टर है, कोई काम नहीं दे रहा, मदद कर देती हूं। लेकिन नहीं, बॉलीवुड में ‘वेटरन’ का मतलब है शातिर-दिमाग, मंझा हुआ खिलाड़ी, जो घाट-घाट का पानी पीकर सारी चालबाजी सीख चुका है, जिसको सारी मीडिया और पब्लिक मैनिपुलेशन आती है।”

तनुश्री ने लिखा, ”वे अपनी वरिष्ठता और अनुभव की छवि के पीछे अपनी असलियत छिपा सकते हैं। ऐसे लोगों को मीडिया और जनता की धारणा को अपने पक्ष में करने का तरीका पता होता है।”

तनुश्री ने चेतावनी देते हुए लिखा, ”ऐसे इंसान पर सिर्फ उनकी उम्र की वजह से भरोसा न करें। इनमें से कुछ बहुत ही बुरे और नकारात्मक लोग, जिनके युवाओं के प्रति बहुत ही बुरे और घटिया इरादे हैं, वेटरन की कैटेगरी में हैं। वे युवा और विशेषाधिकार प्राप्त लोगों से नफरत करते हैं और उन्हें बर्बाद करने के लिए कुछ भी करेंगे। बॉलीवुड ने इस घटना को बार-बार देखा है।”

तनुश्री ने पोस्ट में लिखा, ”किसी इंसान को उसकी उम्र, शक्ल या बैकग्राउंड देखकर अच्छा या बुरा नहीं मानना चाहिए। असली पहचान उसके भीतर के स्वभाव और उसके कर्मों से होती है। यह दुनिया हम जैसे लोगों ने बनाई है और उन लोगों द्वारा नष्ट की जाती है, जो शालीनता का मुखौटा पहनते हैं।”

इसके बाद तनुश्री ने लिखा, ”आत्माओं और दिव्यता को पहचानें। अगर सिर्फ उम्रदराज या अनुभवी होना ही किसी को सम्मान के लायक बनाता है, तो फिर बुराई करने वाले राक्षसों को भी ‘वेटरन’ कहा जा सकता है।”

आखिर में तनुश्री ने अपने पूरे अनुभव के बारे में बताते हुए लिखा, ”मैंने एक बहुत बड़ी सीख ली है। आज मैं सम्मान उम्र के हिसाब से नहीं, बल्कि चरित्र के हिसाब से देती हूं।”