पटना, 8 मई (आईएएनएस)। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एनडीए सरकार पर तीखा हमला किया।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्य कार्यालय में स्थित कर्पूरी सभागार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने आरोप लगाया कि नव विस्तारित मंत्रिमंडल में विकास की दृष्टि और सामाजिक संतुलन दोनों का अभाव है।
तेजस्वी ने दावा किया कि एनडीए ने पिछले छह महीनों में से लगभग आधा समय केवल सरकार गठन की प्रक्रिया में ही व्यतीत किया है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ छह महीनों में बिहार में दो मुख्यमंत्री और चार उपमुख्यमंत्री बदल चुके हैं। कल के मंत्रिमंडल विस्तार में न तो कोई दूरदृष्टि झलकती है और न ही विकासात्मक सोच।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भाजपा और जदयू को वंशवादी राजनीति की आलोचना करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
तेजस्वी ने विशेष रूप से नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर निशाना साधा।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्तियों को मंत्री कैसे नियुक्त किया जा सकता है जिन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा और न ही जनता का जनादेश प्राप्त किया।
तेजस्वी ने टिप्पणी की कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर ‘शहजादों’ की बात करते थे। अब भाजपा और जदयू के नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि असली ‘शहजादे’ कौन हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए मंत्रिमंडल में 17 मंत्री राजनीतिक परिवारों से आते हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी और जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र भी शामिल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार की मांग कर रहे बेरोजगार युवाओं की आवाज दबा रही है।
उन्होंने कहा कि जब छात्रों ने रोजगार की मांग की, तो उन पर लाठियां बरसाई गईं। यह सरकार बलपूर्वक युवाओं की मांगों को कुचलना चाहती है।
राजद नेता ने आगे दावा किया कि मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय, जातिगत और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में विफलता मिली है।

