तेलंगाना का लक्ष्य 2028 तक सर्वश्रेष्ठ सड़क नेटवर्क बनाना

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हैदराबाद, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना का लक्ष्य 2028 तक देश का सर्वश्रेष्ठ सड़क नेटवर्क बनाना है और इसके लिए 98,000 करोड़ रुपए की लागत से सड़क विकास कार्यों की योजना बनाई गई है।

बुधवार को सड़क निर्माण और अवसंरचना विकास पर हुई विशेष समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और राज्य के सड़क एवं भवन मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने अधिकारियों को 98,000 करोड़ रुपए के सड़क विकास कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और इसके त्वरित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मंत्रियों ने कहा कि अविभाजित राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व रूप से, 98,000 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण और विकास कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में राज्य सरकार 2028 के अंत तक तेलंगाना को सड़क अवसंरचना के मामले में भारत का नंबर एक राज्य बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

मंत्री वेंकट रेड्डी ने घोषणा की कि प्रतिष्ठित इंडियन रोड्स कांग्रेस (आईआरसी) सम्मेलन, जो भारत और विश्व भर के ठेकेदारों और अवसंरचना विशेषज्ञों को आकर्षित करता है, नवंबर 2026 में हैदराबाद इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपोजिशन्स लिमिटेड, हैदराबाद में आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ अपने अच्छे संबंधों के कारण वे भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों से प्रतिस्पर्धा के बावजूद इस आयोजन को हैदराबाद में लाने में सफल रहे।

मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि राज्य से मोहन नायक को आईआरसी अध्यक्ष चुना गया है।

उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के लिए उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने विश्वास जताया कि आईआरसी की बैठक से राज्य में 20,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आएगा।

सड़क विकास कार्यों में लगभग 300 गांवों में संपर्क समस्याओं के समाधान के लिए 148 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली संपर्क सड़कें शामिल हैं।

मंत्री वेंकट रेड्डी ने कहा कि हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (एचएएम) के तहत 13,000 करोड़ रुपए की लागत से 6,000 किलोमीटर सड़कों का विकास किया जा रहा है।

मूल्य निविदाएं पूरी हो चुकी हैं और काम जल्द ही शुरू होगा।

हैदराबाद-विजयवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग को 20,000 करोड़ रुपए की लागत से आठ लेन के कॉरिडोर (छह मुख्य लेन और दो सर्विस लेन) में अपग्रेड किया जा रहा है।

चौटुप्पल और चित्याल जैसे दुर्घटना-संभावित क्षेत्रों में 500 करोड़ रुपए की लागत से फ्लाईओवर और पुलों का निर्माण किया जा रहा है।

फ्यूचर सिटी से अमरावती-बांदर बंदरगाह तक 20,000 करोड़ रुपए की लागत से एक नई सड़क परियोजना की योजना बनाई जा रही है, जिसके लिए संरेखण प्रस्ताव केंद्र सरकार को प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

बुलेट ट्रेन के लिए एक समानांतर संरेखण का भी प्रस्ताव रखा गया है।

मंत्री ने आगे बताया कि मन्नानूर से श्रीशैलम तक 52 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए 8,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय रिंग रोड के लिए 36,000 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिसे एक क्रांतिकारी परियोजना बताया गया है।