तेलंगाना को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस पूरी ताकत से जुटे: डीजीपी सी.वी. आनंद

0
3

हैदराबाद, 7 मई (आईएएनएस)। तेलंगाना के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने गुरुवार को राज्य की पुलिस फोर्स से आह्वान किया कि जिस तरह विशेष एजेंसियों ने मिलकर तेलंगाना को माओवादी प्रभाव से मुक्त किया था, उसी भावना के साथ अब राज्य को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए काम किया जाए।

हैदराबाद में ड्रग्स नियंत्रण के लिए बनाई गई विशेष इकाई ईगल फ़ोर्स की समीक्षा बैठक के दौरान डीजीपी ने कहा कि लोगों को भी अपने बच्चों के भविष्य के लिए इस अभियान में भागीदार बनना होगा।

उन्होंने कहा कि डीजीपी का कार्यभार संभालने के बाद कई विंग्स की समीक्षा बाकी थी, लेकिन उन्होंने सबसे पहले ईगल फ़ोर्स की समीक्षा को प्राथमिकता दी।

डीजीपी ने कहा कि जिस तरह स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो और ग्रेहाउंड ने नक्सल विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई, उसी तरह ईगल फ़ोर्स भी सभी जिलों को खुफिया और जांच संबंधी सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने जिला एसपी और पुलिस कमिश्नरों से ईगल फ़ोर्स के साथ समन्वय बनाकर काम करने की अपील की।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 2023 में दर्ज 1,464 ड्रग मामलों की संख्या बढ़कर 2025 में 2,734 हो गई है। वहीं गिरफ्तारियां 3,157 से बढ़कर 5,703 तक पहुंच गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर प्रति केस गिरफ्तारी का औसत 1.3 है, जबकि तेलंगाना में यह औसत 3.1 है, जिससे पता चलता है कि पुलिस केवल सप्लायर ही नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क और मास्टरमाइंड तक पहुंच रही है।

डीजीपी ने अधिकारियों को आधुनिक तकनीक, मनी ट्रेल, डिजिटल फॉरेंसिक, जियो-लोकेशन ट्रैकिंग, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और डार्क वेब पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विदेशी ड्रग सिंडिकेट्स और हवाला नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने पर जोर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि ईगल फ़ोर्स ने गोवा और दिल्ली से संचालित नाइजीरियन ड्रग कार्टेल और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

बैठक में यह भी बताया गया कि अब तक नाइजीरिया, घाना और सूडान समेत विभिन्न देशों के 93 विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया जा चुका है।

डीजीपी ने स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 4,500 एंटी-ड्रग कमेटियां बनाई गई हैं, लेकिन वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं। अब नई व्यापक समितियां गठित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जो ड्रग्स के अलावा रैगिंग, साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा, बाल शोषण और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी नजर रखेंगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी शिक्षण संस्थान में ड्रग्स या अन्य अवैध गतिविधियां पाई गईं और संस्थान ने इसकी जानकारी नहीं दी, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी ने कहा कि केवल “बदनामी” के डर से ऐसी घटनाएं छिपाना जिम्मेदारी से बचना है।

इसके साथ ही छात्रों के एडमिशन के समय “मैं ड्रग्स नहीं लूंगा” शपथ पत्र को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।