हैदराबाद, 24 जून (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्र से अपील की है कि वह तुंगभद्रा परियोजना से राज्य के पानी के वाजिब हिस्से का इस्तेमाल सुनिश्चित करने और इससे जुड़े राज्यों के बीच तालमेल बनाने के लिए दखल दे।
तेलंगाना को तुंगभद्रा बांध और नदी के बहाव से 15.9 टीएमसी पानी मिलना चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि अभी पानी का बहाव पांच से छह टीएमसी से ज्यादा नहीं है।
आरडीएस (राजोली बांदा डायवर्जन स्कीम) के तहत, जोगुलम्बा गडवाल जिले के लगभग 75 गांवों में 83,987 एकड़ जमीन की सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है।
तीन राज्यों के शामिल होने की वजह से, उन्होंने मांग की कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच पानी के हिस्से का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) की देखरेख में तुंगभद्रा बोर्ड को मजबूत किया जाए।
बुधवार शाम को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तुंगभद्रा प्रोजेक्ट, आरडीएस और अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों को लेकर एक समीक्षा बैठक की।
बैठक में सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, सांसद मल्लू रवि, सरकारी सलाहकार जितेंद्र रेड्डी, सिंचाई सलाहकार आदित्य नाथ दास, सीएमओ सचिव माणिक राज, सिंचाई सचिव श्रीधर, स्पेशल चीफ सेक्रेटरी (ऊर्जा) नवीन मित्तल और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीएस एनीकट असुरक्षित हो गया है और ज़ोर दिया कि सुरक्षा से जुड़े जरूरी कामों की पहचान तुरंत की जाए।
आरडीएस नहर के आधुनिकीकरण के लिए तेलंगाना सरकार पहले ही 59 करोड़ रुपए जमा कर चुकी है, लेकिन काम अभी भी अधूरे हैं। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि पैकेज 3 और 4 के तहत काम पूरा हो चुका है, लेकिन पैकेज 1 और 2 के तहत काम अभी शुरू नहीं हुआ है।
यह तय किया गया कि गुरुवार को तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के बीच होने वाली बैठक में पहले दो पैकेज के रुके हुए कामों का मुद्दा प्राथमिकता से उठाया जाएगा। वे कर्नाटक के होसापेटे में तुंगभद्रा बांध के नए लगाए गए क्रेस्ट गेट्स के उद्घाटन के दौरान मिलेंगे।
इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि तेलंगाना की तरफ़ बहुत ज्यादा गाद जमा होने के कारण आरडीएस पर पानी का डायवर्जन उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रहा है।
एक एक्सपर्ट कमेटी ने 2004 में गाद हटाने की सिफारिश की थी, लेकिन उन सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है। यह तय किया गया कि केंद्र से गाद हटाने के काम पर तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया जाए। चूंकि गाद जमा होने वाला इलाका कर्नाटक में है, इसलिए उस राज्य का सहयोग लेने का फैसला किया गया।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा जाए, जिसमें गाद हटाने के काम के साथ-साथ 2004 की एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों को लागू करने की मांग की जाए।
उन्होंने पिछली रिपोर्ट के नतीजों की तुलना मौजूदा जमीनी हकीकत से करने की सलाह दी और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तुंगभद्रा लिफ्ट सिंचाई योजना के तहत पानी के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करने का निर्देश दिया।

