हैदराबाद, 3 नवंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह प्रस्तावित तुम्मदिहट्टी बांध के निर्माण पर महाराष्ट्र के साथ बातचीत जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को महाराष्ट्र सरकार के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने और बातचीत जारी रखने का निर्देश दिया।
उन्होंने अधिकारियों को जलमग्न होने वाले संभावित क्षेत्रों का विस्तृत विवरण तैयार रखने का निर्देश दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा समझौतों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों सहित सभी प्रासंगिक दस्तावेजों का महाराष्ट्र सरकार के साथ आदान-प्रदान किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित तुम्मदिहट्टी बांध के निर्माण पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र के साथ हाल ही में हुई चर्चाओं और अन्य संबंधित मुद्दों के संबंध में अधिकारियों को कुछ सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महाराष्ट्र में जलमग्न होने से प्रभावित होने वाली किसी भी भूमि के लिए पर्याप्त मुआवजा देने को तैयार है और साथ ही दोनों राज्य सरकारों के संयुक्त खाते में धनराशि जमा करने के लिए भी तैयार है।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना को महाराष्ट्र द्वारा संभावित जलमग्नता का सर्वेक्षण कराने पर कोई आपत्ति नहीं होगी।
अधिकारियों को महाराष्ट्र द्वारा मांगी गई सभी जानकारी समय पर उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 अक्टूबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। उन्होंने 152 मीटर ऊंचे तुम्मदिहट्टी बांध के निर्माण की अनुमति देने के तेलंगाना के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी।
तेलंगाना के अनुरोध पर पुनर्विचार करने की इच्छा व्यक्त करते हुए फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले कई तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक कदम पूरे करने होंगे।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों के प्रधान सचिवों की अध्यक्षता में अधिकारियों की एक संयुक्त समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था।
समिति प्रस्तावित बांध की ऊंचाई, जल उपलब्धता, जलमग्नता के प्रभाव, प्रभावित कृषि भूमि, मुआवजे की आवश्यकताएं और अन्य तकनीकी मामलों की जांच करेगी।
इसमें जलमग्नता की सीमा और भूमि तथा स्थानीय समुदायों पर संभावित प्रभाव के संबंध में दोनों राज्यों के आकलन और चिंताओं की भी जांच की जाएगी, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक दृष्टिकोण भी शामिल होंगे।
यह सुझाव दिया गया कि दोनों राज्यों के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर आगे की चर्चाओं और आवश्यक कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा और कार्ययोजना तैयार करें।
इस बात पर सहमति बनी कि आगे का रास्ता दोनों राज्यों के अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा तय किया जाएगा।
