नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) द्वारा तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को औपचारिक रूप से “बिना शर्त समर्थन” दिए जाने के बाद पार्टी के महासचिव डी राजा ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया में कोई “बाधा” नहीं डालनी चाहिए।
तमिलनाडु के राजनीतिक घटनाक्रम पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए डी. राजा ने कहा कि अभिनेता-राजनेता विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि टीवीके ने उनकी पार्टी के अलावा माकपा और वीसीके से भी समर्थन मांगा था।
डी. राजा ने कहा, “हमने पत्र का सकारात्मक जवाब दिया है। हमारी पार्टी की तमिलनाडु इकाई ने राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद यह फैसला लिया है। हमने टीवीके को समर्थन देने पर सहमति जताई है।”
उन्होंने कहा कि भाकपा ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वह सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।
उन्होंने कहा, “राज्यपाल को किसी तरह की बाधा नहीं पैदा करनी चाहिए। उन्हें संसदीय लोकतंत्र की स्थापित परंपराओं और नियमों का पालन करना चाहिए। सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए।”
डी. राजा ने कहा कि यह फैसला तमिलनाडु में स्थिर और “धर्मनिरपेक्ष” सरकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
तमिलनाडु विधानसभा में भाकपा और माकपा के दो-दो विधायक हैं।
इस बीच शिवसेना-यूबीटी की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में “हॉर्स ट्रेडिंग” का माहौल बनाने के लिए राज्यपाल कार्यालय का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, “जनता के जनादेश का सम्मान होना चाहिए, जिसने टीवीके को सबसे बड़ी पार्टी बनाया है।”
23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में लगातार राजनीतिक हलचल और गठबंधन समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
4 मई को घोषित चुनाव परिणामों में 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कांग्रेस ने पहले ही विजय की पार्टी को समर्थन दे दिया था, जिससे गठबंधन की संख्या 112 तक पहुंच गई थी।
अब भाकपा और माकपा के समर्थन के बाद, जो पहले डीएमके नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस का हिस्सा थीं, विजय खेमे की संख्या बहुमत के आंकड़े 118 के और करीब पहुंच गई है।

