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दवाइयों के लिफाफों पर हिंदी को लेकर तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री का डीएमके पर हमला

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चेन्नई, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के.जी. अरुणराज ने सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में दवाइयों के लिफाफों पर हिंदी के इस्तेमाल को लेकर डीएमके पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि करूर और कोयंबटूर के सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल किए जा रहे विवादित लिफाफे डीएमके सरकार के कार्यकाल में तैयार और स्वीकृत किए गए थे।

मंत्री ने एक बयान में कहा कि सरकार के संज्ञान में मामला आने के तुरंत बाद दोनों अस्पतालों में इन लिफाफों का इस्तेमाल रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने पिछली सरकार से मिले लिफाफों के डिजाइन या उनमें इस्तेमाल की गई भाषाओं में कोई बदलाव नहीं किया है।

अरुणराज ने आरोप लगाया कि डीएमके इन लिफाफों की खरीद से जुड़े तथ्यों को छिपाकर मौजूदा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने डीएमके के विरोध को राजनीतिक लाभ के लिए भाषा की भावनाओं का इस्तेमाल करने की कोशिश बताया।

करूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का हवाला देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आम तौर पर दवाइयों के लिफाफे केंद्रीय जेल की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैं। इन लिफाफों पर सुबह, दोपहर और रात में दवा लेने से संबंधित निर्देश केवल तमिल भाषा में होते हैं।

उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में जेल से मिलने वाले लिफाफों की कमी होने के कारण तत्काल चार लाख लिफाफों का ऑर्डर ईरोड जिला प्रिंटिंग इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी को दिया गया था। मंत्री के अनुसार, यह ऑर्डर 31 दिसंबर 2025 को पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल में दिया गया था और जनवरी 2026 में, जब वही सरकार सत्ता में थी, मरीजों को ये लिफाफे बांटे गए थे।

कोयंबटूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल को लेकर अरुणराज ने कहा कि विवादित प्रारूप वाले लिफाफे चिंतामणि कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से छपवाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि इसके लिए प्रशासनिक मंजूरी भी करीब तीन साल पहले डीएमके सरकार के कार्यकाल में दी गई थी।

स्वास्थ्य मंत्री ने सवाल उठाया कि जिस प्रारूप को पिछली डीएमके सरकार ने मंजूरी दी और मरीजों के बीच वितरित कराया, उसी के लिए वह मौजूदा सरकार पर आरोप कैसे लगा सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब ये लिफाफे पहली बार इस्तेमाल किए गए थे, तब डीएमके ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

अरुणराज ने कहा कि मौजूदा सरकार ने केवल स्टॉक की जरूरत पूरी करने के लिए लिफाफे खरीदे थे और पहले से मौजूद प्रारूप को ही बरकरार रखा गया। इसमें न तो डिजाइन बदला गया और न ही भाषा में कोई परिवर्तन किया गया।

उन्होंने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि तमिलगा वेत्री कझगम इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने डीएमके से रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने और इस विवाद का इस्तेमाल राजनीतिक हमलों के लिए नहीं करने की अपील की।

मंत्री ने कहा कि लिफाफों की खरीद और वितरण से जुड़ा रिकॉर्ड डीएमके के आरोपों में विरोधाभास को सामने लाता है। उन्होंने कहा कि मामला सरकार के संज्ञान में आने के बाद विवादित लिफाफों का इस्तेमाल रोक दिया गया।