अगरतला, 24 जून (आईएएनएस)। त्रिपुरा सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और गोविन्द बल्लभ पंत हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टरों और फैकल्टी की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का फैसला किया है। हालांकि, विपक्षी कांग्रेस ने इस फैसले की आलोचना की है और कहा है कि इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
कैबिनेट में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए सरकार के प्रवक्ता और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सुशांत चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री माणिक साहा की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव मंजूर किया गया कि एजीएमसी और जीबीपी अस्पताल से जुड़े फैकल्टी और मेडिकल ऑफिसरों को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने इन डॉक्टरों के लिए बेसिक सैलरी में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है, जो नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस के रूप में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले की विस्तृत अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना और राज्य के प्रमुख मेडिकल संस्थान में जवाबदेही बढ़ाना है।
मंत्री ने मुख्यमंत्री के हवाले से कहा कि आधुनिक उपकरणों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद मरीज सेवाओं को लेकर शिकायतें मिलती रहती हैं।
सरकार ने यह फैसला डॉक्टर संगठनों और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद लिया है।
अभी करीब 350 फैकल्टी सदस्य और मेडिकल अधिकारी एजीएमसी और जीबीपी अस्पताल में कार्यरत हैं, जो राज्य का सबसे बड़ा और पुराना रेफरल अस्पताल है।
सरकार ने कहा है कि यह नीति पहले सिर्फ एजीएमसी और जीबीपी अस्पताल तक सीमित रहेगी और इसके प्रभाव की समीक्षा के बाद इसे अन्य सरकारी अस्पतालों में भी लागू किया जा सकता है।
वहीं, कांग्रेस नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुधिप रॉय बर्मन ने फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इससे कई अनुभवी डॉक्टर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सकते हैं ताकि वे निजी प्रैक्टिस जारी रख सकें।
उन्होंने चेतावनी दी कि इससे मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई और मरीजों की देखभाल दोनों पर असर पड़ेगा।
रॉय बर्मन ने सरकार से अपील की है कि अधिसूचना जारी करने से पहले इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।

