चेन्नई, 13 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में शिवकाशी के पास गुरुवार को एक लाइसेंसी पटाखा फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई। हादसे में दो श्रमिकों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
हादसा नमस्कारिथानपट्टी स्थित पटाखा निर्माण इकाई में उस समय हुआ, जब कर्मचारी उत्पादन कार्य में जुटे थे। विस्फोट के बाद फैक्ट्री परिसर के एक हिस्से में तेजी से आग फैल गई और आसमान में धुएं का गुबार उठने लगा। इससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
हादसे में दो श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान तत्काल नहीं हो सकी है। फिलहाल किसी अन्य के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सूचना मिलते ही दमकल एवं बचाव सेवा के कर्मी मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री रखे होने की आशंका के बीच दमकलकर्मी आग पर काबू पाने और प्रभावित ढांचों को ठंडा करने में जुटे रहे।
पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। आसपास के इलाके को घेरकर लोगों और तमाशबीनों को फैक्ट्री के पास जाने से रोक दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्फोट के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारी यह भी जांच करेंगे कि फैक्ट्री में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं, रसायनों और तैयार पटाखों का भंडारण किस तरह किया गया था तथा उत्पादन लाइसेंस में तय शर्तों के अनुरूप हो रहा था या नहीं। फिलहाल विस्फोट के कारण का पता नहीं चल सका है।
गुरुवार का हादसा विरुधुनगर में पटाखा उद्योग से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को एक बार फिर सामने लाता है। इस साल अप्रैल में विरुधुनगर के पास कट्टनारपट्टी में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 25 श्रमिकों की मौत हुई थी, जिनमें कई महिलाएं थीं। जुलाई में जिले में एक कथित अवैध पटाखा इकाई में हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हुई थी।
विरुधुनगर में इससे पहले भी कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। फरवरी 2024 में रामुथेवनपट्टी में हुए विस्फोट में 10 श्रमिकों की मौत हुई थी। मई 2024 में शिवकाशी के पास एक अन्य विस्फोट में 10 लोगों की जान गई थी, जबकि जून 2024 में सत्तूर के पास हुए अलग हादसे में चार श्रमिकों की मौत हुई थी।
सितंबर 2012 में शिवकाशी के पास एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण हादसे में 40 लोगों की मौत और 70 से अधिक लोग घायल हुए थे। लगातार हो रहे हादसों के बाद श्रमिक संगठनों और सुरक्षा कार्यकर्ताओं की ओर से पटाखा इकाइयों में सख्त निरीक्षण, रसायनों के इस्तेमाल की निर्धारित सीमा का पालन और अनधिकृत उत्पादन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठती रही है।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गुरुवार के हादसे में लापरवाही या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की कोई भूमिका थी या नहीं।

