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यूक्रेन के विदेश मंत्री और एस जयशंकर की फोन पर वार्ता, काला सागर और समुद्री आवाजाही की स्‍वतंत्रता पर की चर्चा

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कीव/नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने फोन पर हुई बातचीत में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को काला सागर की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। साथ ही, क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल करने के तरीकों पर चर्चा की।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब काला सागर आर्थिक और सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र बन गया है। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के वाणिज्यिक जहाजों, बंदरगाहों की बुनियादी सुविधाओं और ऊर्जा पाइपलाइनों पर लगातार और तीव्र हमले कर रहे हैं।

सिबिहा ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “मेरी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ फोन पर बात हुई। मैंने उन्हें यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रामकता और हमारे बंदरगाहों तथा समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों के कारण काला सागर में पैदा हुई मुश्किल स्थिति के बारे में जानकारी दी।”

उन्होंने कहा कि काला सागर में जहाजों पर हो रहे हमले केवल यूक्रेन के खाद्य निर्यात को ही प्रभावित नहीं कर रहे हैं, बल्कि दुनिया भर में लाखों परिवारों के लिए भी सीधा खतरा पैदा कर रहे हैं।

सिबिहा ने कहा, “मैंने यह रेखांकित किया कि यूक्रेन के खाद्य निर्यात को बाधित करने की रूस की कोशिशें वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। इसका असर हमारे क्षेत्र से कहीं आगे तक जाता है और दुनिया भर में लाखों परिवारों को जोखिम में डालता है।”

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों पक्षों ने काला सागर में ‘समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता को बहाल करने और सुरक्षित बनाने’ के उपायों पर भी चर्चा की।

उन्होंने आगे कहा, “हमने यूक्रेन और भारत के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और आपसी हितों से जुड़े एजेंडे पर भी बात की। हमने आने वाले संपर्कों के बारे में समन्वय किया और लगातार संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा कि उन्होंने सिबिहा के साथ हुई बातचीत की सराहना की और संवाद एवं कूटनीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा, “आज शाम यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा के साथ हुई बातचीत की सराहना करता हूं। हमारी चर्चा का मुख्य विषय काला सागर में व्यापारिक गतिविधियों की बहाली, सभी नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। भारत हमेशा संवाद और कूटनीति का दृढ़ समर्थक रहा है।”

यह घटनाक्रम हाल ही में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। 25 अगस्त को रूस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि उसने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें महत्वपूर्ण पिवदेन्नी बंदरगाह पर तीन मालवाहक जहाज और एक टैंकर निशाना बने। इसके अलावा, ओडेसा बंदरगाह पर भी एक अन्य मालवाहक जहाज पर हमला किया गया।

इस बीच, 25 अगस्त को ही विदेश मंत्री जयशंकर ने मॉस्को में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी विस्तृत बातचीत की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय तनाव वाले मुद्दों, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय विषयों पर चर्चा की।

जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से इस बातचीत की जानकारी साझा की और बताया कि दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

उन्होंने लिखा, “रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ व्यापक बातचीत हुई। हमने द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय तनाव वाले मुद्दों, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय मामलों पर चर्चा की।”

भारत और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर लगातार उच्च-स्तरीय संवाद जारी है।