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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानवता को नियंत्रित न करे, अभी से सतर्क रहना होगा : रूसी ड्यूमा अध्यक्ष

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मॉस्को/नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। रूस के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने सोमवार को कहा कि ब्रिक्स देश प्रत्येक राज्य के विकास के संप्रभु पथ के अधिकार को मान्यता देने के लिए एकजुट हैं।

नई दिल्ली में शुरू हुए 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में वोलोदिन ने कहा, “हम अलग-अलग राजनीतिक प्रणालियों, आर्थिक मॉडलों और परंपराओं वाले देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन हम एक बहुध्रुवीय दुनिया बनाने के लिए एकजुट हैं। हम अलग-अलग दृष्टिकोणों और राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करते हैं और प्रत्येक देश के विकास के अपने संप्रभु रास्ते को चुनने के अधिकार को मान्यता देते हैं।”

ब्रिक्स नेताओं ने जन केंद्रित विकास सुनिश्चित करने में संसदों की भूमिका को मजबूत करने पर अपने विचार रखे। उन्होंने भविष्य के विकास के लिए सरकारी संस्थानों की स्थिरता बनाए रखने में संसदों की भूमिका के बारे में भी बात की।

नई दिल्ली में दो दिवसीय मंच में भाग लेने आए वोलोदिन ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि अपने अस्तित्व के 20 वर्षों में ब्रिक्स उभरती हुई बहुध्रुवीय दुनिया और एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के मुख्य स्तंभों में से एक बन गया है।

स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष के अनुसार, यह संगठन सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों में से एक बन गया है, जो दुनिया के अधिकांश देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके भीतर आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है और सदस्य देश वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स वैश्विक जीडीपी में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय स्तर पर, इस समूह की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए हर अवसर का उपयोग किया जाना चाहिए।

वोलोदिन ने कहा, “ब्रिक्स के भीतर हमारे देशों के बीच संबंध प्रभावी सहयोग का एक उदाहरण हैं। यहां संप्रभु देश आपसी लाभ की शर्तों पर काम करते हैं, अपनी अर्थव्यवस्थाओं का विकास करते हैं, और अपने नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाते हैं।”

ड्यूमा अध्यक्ष ने ब्रिक्स संगठन के भीतर एक विशेषज्ञ परिषद बनाने का भी प्रस्ताव रखा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हों।

उन्होंने कहा, “इससे हम विधायी क्षेत्र की बेहतरीन प्रथाओं को साझा कर सकेंगे। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल अवसर लाता है, बल्कि चुनौतियां भी पेश करता है। हमें यह याद रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लोगों की भलाई के लिए काम करे। हमें ऐसी स्थितियों से बचना चाहिए, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानवता को नियंत्रित करने लगे। यह एक ऐसा खतरा है जिसे हमें पहले ही रोक देना चाहिए।”

दिन में इससे पहले, वोलोदिन ने नई दिल्ली में एक फोरम के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

वोलोदिन ने रविवार को अपनी भारत यात्रा शुरू की और नई दिल्ली में ब्रिक्स फोरम के दौरान अपने विदेशी समकक्षों से द्विपक्षीय चर्चा की।

रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘भारतीय संसद के सदस्यों के साथ भी बैठकें और बातचीत तय की गई हैं। रूस और भारत के संबंध एक विशेष रणनीतिक साझेदारी हैं, जो ‘दोस्ती’ और आपसी लाभ वाले सहयोग की परंपराओं पर आधारित हैं।

मंत्रालय ने कहा, “रूस और भारत के बीच संबंध एक विशेष रणनीतिक साझेदारी हैं, जो दोस्ती, भरोसे और आपसी लाभ वाले सहयोग की परंपराओं पर आधारित हैं। संसदीय सहयोग के जरिए इन संबंधों को विकसित करने और मजबूत करने में योगदान देना महत्वपूर्ण है।”