वाशिंगटन, 26 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि अमेरिकी सेना ने सोमवार को दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नौकाओं पर हमला किया।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बयान में कहा, “अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए दक्षिणी ईरान में आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की गई। ईरानी बलों से खतरा था, इसलिए यह कदम उठाया गया।”
उन्होंने बताया कि निशानों में मिसाइल लॉन्च साइट्स और वे ईरानी नौकाएं शामिल थीं जो समुद्र में बारूदी सुरंगें लगाने की कोशिश कर रही थीं।
उन्होंने आगे कहा, “सीजफायर के दौरान भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड अपने सैनिकों की सुरक्षा कर रहा है और संयम बरत रहा है।”
इन हमलों से पहले से ही कमजोर चल रहे युद्धविराम पर खतरा बढ़ गया है। यह सीजफायर आठ अप्रैल से लागू हुआ था। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की कोशिशें चल रही हैं। इस युद्ध की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और तेल और ऊर्जा सप्लाई में भारी रुकावट आई है।
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली खाड़ी की समुद्री आवाजाही पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है, जबकि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रही है।
पिछले हफ्ते अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि इस नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से 100 जहाजों का रास्ता बदल गया और चार जहाज काम करने लायक नहीं रहे।
सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, “इस नाकेबंदी की वजह से ईरानी बंदरगाहों से होने वाला व्यापार पूरी तरह रुक गया है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।”
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। उन्होंने सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान समेत कई देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील भी की।
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ बातचीत या तो ‘सबके लिए शानदार समझौते’ में बदलेगी या फिर हालात दोबारा युद्ध की तरफ जा सकते हैं।
उन्होंने लिखा, “या तो यह सबके लिए एक शानदार समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हालात फिर से युद्ध और गोलीबारी तक पहुंच सकते हैं और इस बार लड़ाई पहले से ज्यादा बड़ी और खतरनाक होगी। लेकिन ऐसा कोई नहीं चाहता।”
ट्रंप की यह टिप्पणी उस घोषणा के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान और मध्य पूर्व व दक्षिण एशिया के कई देशों के बीच एक बड़ा क्षेत्रीय समझौता लगभग तय होने वाला है।

