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अमेरिका में बढ़ती भारत-विरोधी बयानबाजी हिंसा में बदल रही : राजा कृष्णमूर्ति (आईएएनएस इंटरव्यू)

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वाशिंगटन, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत भरी बयानबाजी अब हिंसा का रूप ले रही है। उन्होंने कुछ राजनीतिक नेताओं पर माहौल खराब करने का आरोप लगाया और सवाल उठाया कि शिकागो के पास एक हिंदू मंदिर पर कथित हमले की दो साल पुरानी साजिश का पता एफबीआई क्यों नहीं लगा सकी?

आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में भारतीय मूल के सांसद ने कहा कि 11 अक्टूबर को बालाजी मंदिर के बाहर एक संभावित बड़े नरसंहार को सिर्फ इसलिए टाला जा सका क्योंकि हमलावर की बंदूक जाम हो गई थी।

कृष्णमूर्ति ने कहा, “मेरे परिवार सहित कई परिवार उस समय बालाजी मंदिर के अंदर नवरात्रि मना रहे थे। हमें बिल्कुल नहीं पता था कि मंदिर के बाहर एक बंदूकधारी मौजूद है, जिसके पास एआर-15 शैली का हथियार और 300 से ज्यादा गोलियां थीं। वह बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने की तैयारी में था।”

उनके मुताबिक, हमलावर ने एक गोली चलाई, लेकिन उसके बाद हथियार में खराबी आ गई, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई।

सांसद ने कहा कि उन्होंने इस मामले में जांच की मांग की थी, लेकिन अब तक एफबीआई की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

जब उनसे एफबीआई निदेशक काश पटेल की चुप्पी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता। इसके बारे में आपको उनसे ही पूछना होगा।”

कृष्णमूर्ति ने उन जनप्रतिनिधियों की भी आलोचना की, जिन्होंने इस घटना की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की। उन्होंने कहा, “जब आप चुप रहते हैं, तो कई बार ऐसा लगता है कि आप जो हुआ उसे स्वीकार कर रहे हैं या उसका समर्थन कर रहे हैं। हिंदू, मुस्लिम, यहूदी, ईसाई या सिख, किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत हो, राजनीतिक नेताओं को खुलकर उसका विरोध करना चाहिए।”

उन्होंने भारतीयों और एशियाई समुदायों के खिलाफ बढ़ती दुश्मनी पर कुछ प्रभावशाली नेताओं पर भड़काऊ बयानबाजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, इसमें हमारे देश के शीर्ष स्तर के कुछ नेताओं की भूमिका भी है, जो ऐसे माहौल को बढ़ावा दे रहे हैं।”

उन्होंने टेक्सास के एक ‘एमएजीए’ समर्थक उम्मीदवार बो फ्रेंच का उदाहरण दिया, जिन्होंने फुटबॉल मैच देखने आए भारतीय मूल के बच्चों को ऐसे दिखाया, जैसे वे अमेरिकी लोगों की जगह लेने वाले विदेशी हों। कृष्णमूर्ति ने कहा कि उन बच्चों में से कई टेक्सास में ही पैदा हुए थे। उनके मुताबिक, यह टिप्पणी इमिग्रेशन से जुड़ी चिंता नहीं, बल्कि नस्लीय पूर्वाग्रह को दिखाती है।

उन्होंने अमेरिकी शिक्षा विभाग की एक सोशल मीडिया पोस्ट की भी आलोचना की। इस पोस्ट में टेक्सास विश्वविद्यालय के फुटबॉल मैच में बैठे श्वेत दर्शकों की तस्वीर के साथ ‘मेक कॉलेज फुटबॉल ग्रेट अगेन’ लिखा गया था। कृष्णमूर्ति का आरोप है कि इस तरह की बातें और पोस्ट ऐसे विचारों को और बढ़ावा देती हैं।

उन्होंने कहा क‍ि इस तरह आग में घी डालने से नफरत भरी भाषा और ज्यादा मजबूत और खतरनाक हो जाती है। फिर बस एक व्यक्ति को उस पर कार्रवाई करने की जरूरत होती है। हम अभी यही देख रहे हैं कि नफरत भरी बयानबाजी धीरे-धीरे हिंसा में बदल रही है।

मंदिर की घटना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आरोपी पर हथियारों से जुड़े आरोपों के साथ-साथ आतंकवाद से संबंधित एक कथित आरोप भी लगाया गया है।

उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं, लेकिन घरेलू हिंसक उग्रवाद पर संघीय एजेंसियों को और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। ऐसी घरेलू हिंसक गतिविधियों का पता लगाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं लगाए जा रहे हैं, और यह मामला भी इसका उदाहरण है। कृष्णमूर्ति ने सवाल उठाया कि अगर यह साजिश कथित तौर पर दो साल से चल रही थी तो फिर एजेंसियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?

राजा कृष्णमूर्ति अमेरिका के इलिनॉय राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर प्रमुख आवाजों में से एक माने जाते हैं।