विश्व हिंदू परिषद ने ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण पर चिंता जताई

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कोच्चि, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने शनिवार को ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस मुद्दे से निपटने के लिए सख्त कानूनी उपायों की मांग की।

यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए वीएचपी के राष्ट्रीय महासचिव मिलिंद परांडे ने आरोप लगाया कि केरल ऐसी गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बन गया है और अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए एक कठोर कानून लागू करने का आग्रह किया।

परांडे ने दावा किया कि हिंदू महिलाओं को निशाना बनाने के लिए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं, जिन्हें उन्होंने धर्मांतरण के संगठित प्रयासों से जोड़ा।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं केवल केरल तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति का हिस्सा हैं।

उनके अनुसार इन घटनाओं ने समाज के कुछ वर्गों में चिंता पैदा कर दी है और अधिकारियों द्वारा तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों में कथित कदाचार की रिपोर्टों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन दावों ने अविश्वास की भावना को और बढ़ा दिया है।

परांडे ने कहा कि संगठनों और कंपनियों को विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए और कहा कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) इस मुद्दे पर हितधारकों से संपर्क करेगी।

एक अलग आरोप में, उन्होंने अनुसूचित जनजाति समुदाय की एक नाबालिग लड़की से जुड़े हालिया मामले का हवाला देते हुए दावा किया कि इस घटना ने आरोपियों को मिल रहे गंभीर राजनीतिक संरक्षण और लापरवाही को उजागर किया है।

उन्होंने ऐसे मामलों से निपटने के राज्य सरकार के तरीके की आलोचना की और कमजोर समुदायों की सुरक्षा के लिए कड़े हस्तक्षेप की मांग की।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) नेता ने मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई और मंदिर निधि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्हें राज्य की निगरानी से मुक्त करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर अपना अभियान तेज करेगा और इस बात पर जोर दिया कि मंदिर संसाधनों का उपयोग केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए।

केरल में धार्मिक स्वतंत्रता, धर्मांतरण और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में राज्य की भूमिका जैसे मुद्दों पर चल रही बहसों के बीच ये टिप्पणियां सामने आई हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि ऐसे बयान राज्य में सांप्रदायिक संबंधों और शासन व्यवस्था को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर सकते हैं, जबकि अधिकारी निष्पक्ष रूप से कानून व्यवस्था बनाए रखने का दावा कर रहे हैं।