चंडीगढ़, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित 2047 तक के ‘विकसित भारत’ के सपने को केवल सक्रिय भागीदारी और श्रम सशक्तिकरण के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय और राज्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं की मजबूती मूल रूप से श्रमिकों की कड़ी मेहनत और समर्पण में निहित है, जिनका योगदान भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
मुख्यमंत्री गुरुग्राम के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय श्रम जागरूकता और अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
भारतीय मजदूर संघ द्वारा ऑटो चालकों और अन्य ड्राइवरों के लिए एक समर्पित कल्याणकारी व्यवस्था गठित करने की मांग के जवाब में मुख्यमंत्री सैनी ने घोषणा की कि राज्य सरकार संगठित श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन करेगी।
उन्होंने कहा कि यह बोर्ड ऑटो चालकों और अन्य ड्राइवरों को भी सामाजिक सुरक्षा लाभों का विस्तार प्रदान करेगा।
पहले से घोषित सेवा सुरक्षा ढांचे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया जारी है और उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी पात्र कर्मचारियों को 15 जून तक नियुक्ति पत्र उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिससे रोजगार सुरक्षा और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत होगी।
एक ऐतिहासिक सुधार पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है जिसने वेतन संहिता के प्रावधानों के तहत न्यूनतम मूल वेतन में 35 प्रतिशत की वृद्धि लागू की है।
वेतन वृद्धि के रुझान का विश्लेषण करते हुए उन्होंने बताया कि न्यूनतम वेतन 2005 में 2,903 रुपए था और 2014 तक बढ़कर 6,289 रुपए हो गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में न्यूनतम वेतन अब 19,425 रुपए तक पहुंच गया है।
पिछले 10 वर्षों में वेतन लगभग दोगुना हो गया था, जबकि पिछले ग्यारह वर्षों में यह तीन गुना से अधिक बढ़ गया है, जो श्रम कल्याण और समावेशी आर्थिक विकास के प्रति राज्य सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केंद्र ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीकरण के लिए ‘ई-श्रम’ पोर्टल शुरू किया है।
हरियाणा में 54.32 लाख से अधिक श्रमिक पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जबकि संगठित क्षेत्र में 4.5 लाख प्रतिष्ठानों में 33.58 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं।

