कोलकाता, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने पिछले 25 वर्षों में राज्य में राजनीतिक और चुनाव संबंधी हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की।
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई इस नीति में पिछले ढाई दशकों के दौरान पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हुई हिंसा में मारे गए लोगों के परिवार शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस भर्ती प्रक्रिया में किसी राजनीतिक जुड़ाव को नहीं देखा जाएगा। किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक या कार्यकर्ता के परिवार के सदस्य इसके लिए पात्र होंगे, बशर्ते वे तय प्रशासनिक शर्तों को पूरा करते हों।
25 साल पुरानी घटनाओं से जुड़ी कानूनी जटिलताताओं को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने नीति को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली और कानून विभाग से औपचारिक मंजूरी ली।
इस नीति को लागू करने की तैयारी जिला प्रशासन के स्तर पर की जा रही है। गुरुवार को जनगणना की तैयारियों पर चर्चा के लिए आयोजित एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने राज्यभर के जिलाधिकारियों को इस नीति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने निर्देश दिया कि पात्र परिवारों की पहचान शुरू की जाए और शुरुआती दस्तावेज तैयार किए जाएं।
लाभार्थियों का पता लगाने और उनकी मौत का संबंध पुरानी चुनावी हिंसा से जोड़ने की चुनौती को देखते हुए प्रशासन दावों की पुष्टि के लिए मुख्य रूप से पुलिस रिकॉर्ड, पुरानी केस फाइलों और आधिकारिक मृत्यु दस्तावेजों पर निर्भर रहेगा।
राज्य सरकार जल्द ही एक औपचारिक अधिसूचना जारी करेगी, जिसमें पात्रता की शर्तें (जैसे उम्र सीमा, शैक्षिक योग्यता और पदों का विवरण) बताई जाएंगी। साथ ही सार्वजनिक विज्ञापनों के जरिए आवेदन भी आमंत्रित किए जाएंगे।
प्राप्त आवेदनों की स्थानीय पुलिस थानों, जिला प्रशासन और कानूनी विशेषज्ञों द्वारा कई स्तरों पर जांच की जाएगी। दावों की पुष्टि होने के बाद पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

