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इंडी गठबंधन की ‘मॉक पार्लियामेंट’ बिगड़े हुए शहजादे को खुश करने का ड्रामा: सुधांशु त्रिवेदी

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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विश्व बैंक की ‘इंडिया पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ के निष्कर्षों की सराहना की। पार्टी ने कहा कि इस रिपोर्ट ने इंडी गठबंधन की ‘मॉक पार्लियामेंट’ का मजाक उड़ाया है। विपक्षी गठबंधन ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ‘सार्वजनिक महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया था।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह रिपोर्ट दर्शाती है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ी आबादी को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है।

उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत में अराजकता फैलाने के अपने इरादों में नाकाम रहने के बाद कांग्रेस ने अपने बिगड़े हुए शहजादे को खुश करने के लिए एक ‘नकली संसद’ यानी एक बनावटी ड्रामा आयोजित किया। हालांकि ठीक इसी ड्रामे के समय विश्व बैंक की ओर से एक ठोस सच्चाई देश के सामने आई।

विश्व बैंक ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में बताया है कि 2011 से 2023 के बीच भारत ने बहुआयामी गरीबी को खत्म करने में बड़ी सफलता हासिल की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक दशक पहले भारत में 27 प्रतिशत से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी में जी रहे थे, जबकि आज यह आंकड़ा घटकर केवल 2.6 प्रतिशत रह गया है।

भाजपा सांसद ने कहा कि भारत के लिए विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘गरीबी और समानता रिपोर्ट’ में यह भी कहा गया है कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की ‘लोअर-मिडल-इनकम’ गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी का हिस्सा 2011 के 57.7 प्रतिशत से घटकर 2023 में 16.1 प्रतिशत रह गया है।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार न केवल हर भारतीय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि इसमें सफल भी हो रही है। हमने बहुआयामी गरीबी को खत्म करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है और विश्व बैंक की रिपोर्ट में भी इसे स्वीकार किया गया है।

आर्थिक समानता के लिए अगस्त 2025 में विश्व बैंक द्वारा जारी ‘गिनी इंडेक्स’ का जिक्र करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि इसमें भारत का स्कोर 22.5 रहा है। इसका मतलब यह था कि भारत दुनिया में सबसे अधिक आर्थिक समानता वाले देशों में चौथे स्थान पर था। उस समय जी7 और जी20 देशों में भारत में आर्थिक असमानता सबसे कम थी।

विपक्ष के नेता पर निशाना साधते हुए त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी के बारे में क्या कहा जाए, जिन्होंने अगस्त 2013 में कहा था कि गरीबी एक मानसिकता है जिसका मतलब यह हुआ कि गरीबी केवल मन की एक स्थिति है और बाकी चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी। वहीं डॉ. मनमोहन सिंह ने भी एक बार कहा था कि पैसा पेड़ों पर नहीं उगता।

भाजपा सांसद ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नजरिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के बीच “बहुत बड़ा और स्पष्ट अंतर है। गरीबी को सिर्फ एक मानसिकता मानकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने भारत की एक बड़ी आबादी को घोर गरीबी में फंसाए रखा। हालांकि विश्व बैंक की रिपोर्ट से यह साफ है कि उस समय (कांग्रेस के शासनकाल में) जो 27.6 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे थे, वे अब उससे बाहर आ चुके हैं। इसलिए मुझे लगता है कि विश्व बैंक के इन आंकड़ों ने नकली संसद का मजाक उड़ा दिया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए देश से गरीबी मिटाने के लिए काम कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने की अपनी नाकाम कोशिशों के बाद अब अराजकता फैलाने में लगी हुई है।