नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। आईआईटी दिल्ली के एक पीएचडी स्कॉलर की मौत के मामले में दिल्ली की किशनगढ़ थाना पुलिस ने रविवार को एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, पीएचडी स्कॉलर 18 अगस्त 2026 को मुनिरका गांव स्थित किराए के मकान में बेहोश और घायल अवस्था में मिला था। मकान का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पड़ोसियों ने तोड़कर निकाला था।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घायल स्कॉलर को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। वहां उनका 45 दिन से अधिक समय तक इलाज चला, हालांकि 3 अक्टूबर 2026 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आईआईटी दिल्ली के सुरक्षा अधिकारी की ओर से मिली शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यह घटना आईआईटी दिल्ली परिसर के अंदर नहीं हुई थी, बल्कि मुनिरका गांव में स्थित स्कॉलर के किराए के मकान में हुई थी।
पुलिस के मुताबिक, अब तक की कार्यवाही के दौरान मृतक के परिवार या गवाहों ने किसी भी व्यक्ति पर संदेह या आरोप नहीं लगाया है। घटना के समय पीएचडी स्कॉलर घर में अकेले थे। पुलिस का कहना है कि मकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से भी यह बात सामने आई है।
पुलिस ने इस मामले में अब एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच में जुटी हुई है। इस घटना के बाद आईआईटी स्टूडेंट्स के जिंदगी में होने वाले तनाव को लेकर एक बार फिर से चर्चा छिड़ गई है। 45 दिन तक एम्स में इलाज के बावजूद आखिरकार छात्र को नहीं बचाया जा सका और 3 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।
