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आईआईटी दिल्ली में डीआरडीओ वैज्ञानिक बोले-भविष्य में तकनीक, डिजाइन और बौद्धिक संपदा ही होंगे असली हथियार

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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। आईआईटी दिल्ली के 19वें ओपन हाउस 2026 में डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. बिनय कुमार दास ने कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और भविष्य में तकनीक, बौद्धिक संपदा और डिजाइन ही असली हथियार होंगे। उन्होंने कहा कि देश की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है और युवा शक्ति ही नए भारत का निर्माण करेगी। वहीं, डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणाली (ईसीएस) के महानिदेशक और प्रोफेसर अश्विनी अग्रवाल ने कहा कि आईआईटी दिल्ली समाज और देश के लिए तकनीक विकसित करने की बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा है और लोगों को संस्थान की रिसर्च देखने के लिए आमंत्रित किया।

डॉ. बिनय कुमार दास ने कहा, इस महान संस्थान से जुड़ने का अवसर देने के लिए मैं आईआईटी दिल्ली का बहुत आभारी हूं और सभी को, विशेषकर प्रोफेसर रंजन, आईआईटी के निदेशक, संकाय सदस्यों और उन विद्यार्थियों को मेरी हार्दिक बधाई, जिन्होंने इस कार्यक्रम का आयोजन किया है।”

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि यह बेहद जरूरी और एक शानदार पहल है, जिससे हमारे बच्चों में राष्ट्रवाद, देशभक्ति और ज्ञान की भावना जागृत की जा सकती है। यहां हजारों बच्चे आए हैं और उन्होंने संकाय सदस्यों, उत्पादों तथा हो रहे विकास को देखा है। मुझे लगता है कि यह नए भारत के निर्माण में राष्ट्र की बहुत बड़ी सेवा करेगा।

तकनीक में भारत के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि एक आज युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। युद्ध के बदलते परिदृश्य में टैंकों, बमों, मिसाइलों और उनके इस्तेमाल से भी ज्यादा, मेरा मानना है कि तकनीक ही हथियार बनने वाली है, बौद्धिक संपदा ही हथियार बनने वाली है और डिजाइन ही हथियार बनने वाला है। मुझे लगता है कि जिनके पास ये सब है, वही दुनिया के अग्रणी हैं। आज, हमारे दूरदर्शी और गतिशील प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विजन के साथ मुझे लगता है कि डेढ़ अरब लोगों का पूरा देश भारत को महान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। और यह केवल तकनीकी नवाचार से ही संभव है।

डॉ. दास ने कहा कि एक दिन भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में सर्वोच्च, यानी नंबर एक स्थान पर होगा, सिर्फ इसलिए कि हमारे संस्थानों, प्रोफेसरों और विद्यार्थियों द्वारा ये महान उपलब्धियां विकसित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि आप ही शक्ति हैं। 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति है। यह देश आपका है। आप सभी को इसे आगे ले जाना है। और एक महान भारत बनाने के लिए आपकी शक्ति को सही दिशा में जाना होगा।

उन्होंने कहा कि एक महान भारत केवल अलग-अलग प्रणालियां विकसित करने से नहीं बनता। यह तब बनता है जब तालमेल स्थापित होता है, जब सबकी सोच एक होती है और जब हमारा शिक्षा जगत, हमारा उद्योग, डीआरडीओ और इसरो जैसे हमारे अनुसंधान संगठन, हमारे सभी स्टार्टअप और नवाचार केंद्र, सब मिलकर समन्वय के साथ काम करते हैं।

डॉ. बिनय दास ने कहा कि वास्तव में कुछ ऐसा बनाने के लिए, जो दुनिया में किसी ने न बनाया हो और अगर भारत को दुनिया की नवाचार राजधानी बनना है, तो मुझे लगता है कि पूरे देश के बेहतरीन दिमागों को इस देश को आगे ले जाकर कुछ ऐसा बनाना चाहिए, जिसे किसी और ने न बनाया हो।

उन्होंने कहा कि इस देश में इसे अगले वैश्विक पड़ाव तक ले जाने की पूरी शक्ति है। और यह बदलाव तभी संभव है, जब आपमें से हर युवा अपनी भूमिका निभाए और एक ही मंत्र के साथ विकास करे और उसे साकार करे – भारत पर विश्वास करो, भारत में रहो और भारत से प्रेम करो।

डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणाली (ईसीएस) के महानिदेशक और अनुसंधान और विकास विभाग के डीन प्रोफेसर अश्विनी अग्रवाल ने कहा, “आज मैं बहुत खुश हूं। हम ओपन हाउस 2026 का आयोजन कर रहे हैं, जो इसका 19वां संस्करण है। यह हमारा प्रमुख कार्यक्रम है। हम सभी को आमंत्रित करना चाहते हैं कि वे आकर देखें कि आईआईटी दिल्ली क्या कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, हम देश के अग्रणी संस्थानों में से एक हैं और अपने समाज और देश के लिए तकनीक विकसित करने की हमारी बड़ी जिम्मेदारी है। हम कई क्षेत्रों में काम करते हैं, जैसा कि आप जानते हैं। अगर कोई यह देखना चाहता है कि आईआईटी दिल्ली क्या कर रहा है, तो हमने हाल ही में ‘रिसर्च एमबिट’ नाम की एक वेबसाइट शुरू की है। आप बस इसे टाइप करें और देख सकते हैं कि आईआईटी दिल्ली क्या कर रहा है।

प्रोफेसर अश्विनी अग्रवाल ने कहा कि हमने अपने सभी शोध कार्यक्रमों, शोधपत्रों और प्रकाशनों को इस वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है। आप हर संकाय सदस्य, विभाग और विभिन्न क्षेत्रों के बारे में जान सकते हैं कि वे क्या कर रहे हैं और हमारे संस्थान की गतिविधियों की गहरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तो मैं आप सभी का स्वागत करता हूं कि आप आईआईटी दिल्ली के साथ जुड़ें, खोजबीन करें, देखें कि आईआईटी दिल्ली क्या कर रहा है और यदि संभव हो तो आईआईटी दिल्ली का हिस्सा बनें।