आईएनएस सुनयना जकार्ता पहुंचा, 16 देशों के नौसैनिकों के साथ समुद्री सहयोग को बढ़ावा

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नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का अपतटीय गश्ती पोत आईएनएस ‘सुनयना’ मंगलवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचा है। इंडोनेशिया में आईएनएस ‘सुनयना’ की यह तैनाती भारतीय नौसेना की आईओएस सागर पहल के तहत की जा रही है। आईओएस सागर अभियान के दौरान भारतीय नौसेना का यह तीसरा विदेशी बंदरगाह पड़ाव है।

गौरतलब है कि इस भारतीय नौसैनिक जहाज पर 16 अलग-अलग देशों के नौसैनिकों का दल सवार है। 16 मित्र देशों के इस बहुराष्ट्रीय दल की मौजूदगी समुद्री सहयोग और सामूहिक संचालन क्षमता को मजबूत करने का प्रतीक है।

जकार्ता पहुंचे इस जहाज का यह तीसरा अंतरराष्ट्रीय पड़ाव है। यहां पहुंचने से पहले आईएनएस सुनयना ने मलक्का और सिंगापुर की संकरे जलडमरूमध्य से गुजरते हुए उच्च स्तरीय नौवहन कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया था। वह यात्रा इस बात का प्रमाण भी है कि भारतीय नौसेना जटिल समुद्री मार्गों में भी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालन करने में माहिर है।

दरअसल ‘आईओएस सागर’ पहल भारत के महासागर विजन का एक व्यावहारिक रूप है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति सुनिश्चित करना है।

नौसेना के मुताबिक, इस पहल का मूल मंत्र साझेदारी के माध्यम से नेतृत्व, एकता के माध्यम से शक्ति और शांति के माध्यम से प्रगति है। इस मिशन का हार्बर चरण 16 से 29 मार्च के मध्य भारत में पूरा किया गया था। फिलहाल यह समुद्री चरण है। यह चरण अप्रैल से मई तक चलेगा। इस दौरान हिंद महासागर क्षेत्र के कई मित्र देशों के बंदरगाहों की यात्रा की जानी है।

जकार्ता में आईएनएस सुनयना इंडोनेशियाई नौसेना के साथ कई पेशेवर, सामाजिक और खेल गतिविधियों में भाग लेगा। शिप के कमांडिंग अधिकारी ने इंडोनेशियाई नौसैनिक अधिकारियों से मुलाकात की है।

इंडोनेशिया में इस भारतीय शिप पर पेशेवर विचार-विमर्श, संयुक्त योग सत्र, खेल प्रतियोगिताएं, पोत का दौरा और एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा, प्रस्थान के समय भारत और इंडोनेशियाई नौसेनाओं के बीच एक संयुक्त समुद्री अभ्यास किया जाएगा। पासेक्स नामक इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त संचालन क्षमता को और मजबूती देना है। भारत की यह पहल देश की ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति व एक स्वतंत्र, खुले एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारत का मानना है कि इस क्षेत्र में सभी देशों की सुरक्षा और विकास आपसी सहयोग और विश्वास पर आधारित होना चाहिए, और आईएनएस सुनयना की यह यात्रा उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।