नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका की सैन्य नीतियों पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी कूटनीति की संभावना बनती है, वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुन लेता है। उन्होंने इसे दबाव की रणनीति या किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, ”जब भी कूटनीतिक समाधान का रास्ता खुलता है, अमेरिका एक जोखिम भरा सैन्य अभियान चुन लेता है। क्या यह दबाव बनाने की एक क्रूर रणनीति है या फिर किसी धोखेबाज की साजिश जो अमेरिकी राष्ट्रपति को फिर से दलदल में फंसा देती है? कारण चाहे जो भी हों, नतीजा हमेशा एक ही होता है। ईरानी लोग कभी दबाव के आगे नहीं झुकते और कूटनीति हमेशा इसकी शिकार बनती है।”
साथ ही, अराघची ने दावा करते हुए सीआईए को गलत ठहराया और कहा कि 28 फरवरी की तुलना में हमारे मिसाइल भंडार और लॉन्चर की क्षमता 75 प्रतिशत नहीं, 120 प्रतिशत है।
ईरान की सैन्य क्षमता को स्पष्ट करते हुए अराघची ने अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी की ही एक रिपोर्ट ‘एक्स’ पोस्ट पर साझा की, जिसके अनुसार, अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी के विश्लेषण में यह भी पाया गया कि हफ्तों तक अमेरिका और इजरायल की जबरदस्त बमबारी के बावजूद तेहरान के पास अभी भी बैलिस्टिक मिसाइलों की काफी क्षमता मौजूद है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के पास युद्ध से पहले मौजूद मोबाइल लॉन्चरों का लगभग 75 प्रतिशत और मिसाइलों का लगभग 70 प्रतिशत भंडार अभी सुरक्षित हैं। अधिकारी ने कहा कि इस बात के सबूत मिले हैं कि ईरान का शासन अपनी लगभग सभी भूमिगत भंडारण सुविधाओं को फिर से चालू करने, कुछ क्षतिग्रस्त मिसाइलों की मरम्मत करने और यहां तक कि कुछ नई मिसाइलों को जोड़ने में भी कामयाब रहा है। ये मिसाइलें युद्ध शुरू होने के समय लगभग पूरी हो चुकी थीं।
शुक्रवार को ही ईरान की मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने कहा कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास दो ईरानी जहाजों पर हमला किया। साथ ही, कुछ क्षेत्रीय देशों के सहयोग से दक्षिणी ईरान के नागरिक इलाकों में हवाई हमले भी किए गए।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने कहा कि अमेरिकी सेना की यह ‘आक्रामक’ कार्रवाई ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम का उल्लंघन है।
उन्होंने बताया कि निशाना बनाए गए जहाजों में एक तेल टैंकर था, जो जस्क के पास ईरानी समुद्री सीमा से होर्मुज स्ट्रेट की ओर जा रहा था। दूसरा जहाज संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह के पास इस जलमार्ग में प्रवेश कर रहा था।

