Wednesday, June 3, 2026
SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय तियानआनमेन नरसंहार : जब छात्रों के सामने चीन ने खड़े कर दिए...

तियानआनमेन नरसंहार : जब छात्रों के सामने चीन ने खड़े कर दिए टैंक, हथियारों के बल पर दबाई विरोध की आवाज

0
5

नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। 4 जून… कैलेंडर में दर्ज सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह दिन चीन की राजधानी बीजिंग के तियानआनमेन चौक में 1989 में हुई उस दुखद घटना की याद दिलाता है, जिसे आज ‘थ्येनआनमन दिवस’ या ‘तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार’ के नाम से जाना जाता है।

दरअसल, साल 1989 में चीन के हजारों छात्र और आम नागरिक लोकतांत्रिक सुधारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। अप्रैल महीने से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। लाखों लोग बीजिंग के तियानआनमेन चौक पर इकट्ठा होने लगे। उनका उद्देश्य सरकार को उखाड़ फेंकना नहीं था, बल्कि वे राजनीतिक सुधार, पारदर्शिता और अधिक स्वतंत्रता की मांग कर रहे थे।

उस समय चीन में आर्थिक बदलाव तो हो रहे थे, लेकिन लोगों को राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं मिल रही थी। बढ़ती महंगाई, कम वेतन और भ्रष्टाचार से भी आम जनता परेशान थी। इसी को लेकर एक जनआंदोलन शुरू हुआ। करीब छह सप्ताह तक यह आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा। प्रदर्शनकारी धरना देते रहे, भाषण होते रहे और लोग अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत की उम्मीद करते रहे। चीन की सरकार ने इसे अपने शासन के लिए चुनौती के रूप में देखा। इसके बाद राजधानी बीजिंग में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया।

3 जून 1989 की रात और 4 जून की सुबह हालात अचानक बदल गए। चीनी सेना को आंदोलन खत्म करने का आदेश दिया गया। सैनिक टैंकों और भारी हथियारों के साथ तियानआनमेन चौक और उसके आसपास पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। कई निहत्थे छात्र और नागरिक मारे गए तथा हजारों लोग घायल हुए।

इस घटना में कितने लोगों की मौत हुई, इसका सही आंकड़ा आज भी स्पष्ट नहीं है। चीन सरकार ने कभी आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की। अलग-अलग स्रोतों के अनुसार मृतकों की संख्या सैकड़ों से लेकर हजारों तक बताई जाती है। यही कारण है कि यह घटना आज भी विवाद और चर्चा का विषय बनी हुई है।

चीन में इस विषय पर खुलकर चर्चा करना आज भी आसान नहीं है। वहां मीडिया रिपोर्टिंग, सार्वजनिक कार्यक्रमों और इंटरनेट पर इस घटना से जुड़ी सामग्री पर कड़े नियंत्रण और प्रतिबंध लगाए जाते हैं। चीन की सरकार इस विषय को संवेदनशील मानती है और इसके सार्वजनिक उल्लेख को सीमित करती है।