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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बैंक कर्मचारियों का प्रदर्शन, 5 दिन वर्किंग और पीएलआई में समानता की मांग

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कठुआ, 11 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बैंक कर्मचारियों ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे काम के घंटे बढ़ाने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जाए।

प्रदर्शन कर रहे एक बैंक कर्मचारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “हम हफ्ते में पांच दिन काम करने की मांग कर रहे हैं और हम अपने काम के घंटे बढ़ाने के लिए भी तैयार हैं। इन दो अतिरिक्त दिनों के काम के घंटों को हमारे रोजाना के सुबह और शाम के काम के घंटों में जोड़कर एडजस्ट किया जा सकता है, ताकि ग्राहकों को मिलने वाली सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें। सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।”

कर्मचारी ने बताया कि बैंकिंग सेक्टर में मैनपावर की भारी कमी है। एक-एक काउंटर पर तीन-तीन काउंटर का काम संभाला जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे भी घर में परिवार है, बीवी-बच्चे हैं, मां-बाप हैं। कभी उनको लेकर बाहर जाना हो, हमें भी दूसरे काम होते हैं। यदि हमको ये शनिवार-रविवार ऑफ मिल जाए तो कम से कम हम अपने जो दूसरे कार्य हैं उनको भी कर सकते हैं।”

बैंक कर्मचारियों ने इसके साथ ही परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) में भेदभाव का भी आरोप लगाया। कर्मचारियों के अनुसार, समझौते में अधिकतम 15 दिन के इंसेंटिव की बात तय हुई थी लेकिन अब सीनियर अधिकारियों को 365 दिन तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है, जबकि ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे क्लर्क स्टाफ को सिर्फ 10 से 15 दिन का इंसेंटिव मिल रहा है।

एक कर्मचारी ने कहा, “यह ‘डिवाइड एंड रूल’ वाली पॉलिसी है। इसमें तय हुआ था कि 15 दिन तक का अधिकतम इंसेंटिव दिया जाएगा, जिसकी परफॉर्मेंस ज्यादा अच्छी रहेगी। हालांकि हुआ क्या है, कुछ सीनियर ऑफिसर और हमारे बीच में एक गैप पैदा किया गया है। हमको तो 15 दिन या 10 दिन का दिया जा रहा है और जो सीनियर ऑफिसर हैं, उनको 365 दिन का दिया जा रहा है। यदि एक ऑर्गेनाइजेशन में काम सब बराबर कर रहे हैं, तो इतना अंतर क्यों? ये सरकार की सीधी-सीधी डिवाइड एंड रूल वाली पॉलिसी है।”

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन ने कुछ सीनियर अधिकारियों के खातों में यह इंसेंटिव क्रेडिट भी कर दिया है और बाद में दबाव में इसे होल्ड पर रखा गया है, कैंसिल नहीं किया गया। बैंक कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि 5 डेज बैंकिंग लागू की जाए और पीएलआई में समानता लाई जाए।