ज्येष्ठ कृष्ण की प्रतिपदा तिथि पर देवर्षि नारद जन्मोत्सव, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

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नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। सनातन धर्म में देवर्षि नारद मुनि के जन्मदिवस को नारद जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वैदिक पुराणों और प्राचीन कथाओं के अनुसार, देवर्षि नारद ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं। उन्हें सार्वभौमिक देवदूत माना जाता है। वे देवताओं के लिए समस्त प्रकार की सूचनाओं के प्रमुख स्रोत हैं। ज्येष्ठ कृष्ण की प्रतिपदा तिथि (शनिवार) पर देवर्षि नारद जन्मोत्सव है।

नारद मुनि किसी भी समय स्वर्गलोक, पृथ्वीलोक और पाताललोक का भ्रमण कर सकते हैं। वे पूरे ब्रह्मांड में विचरण करते रहते हैं और कई लोकों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। भगवान विष्णु के परम भक्त की वीणा और “नारायण नारायण” का जाप उनकी भक्ति को दर्शाता है। दृक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नारद जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन अवसर शनिवार 2 मई को है।

शनिवार को सूर्योदय 5 बजकर 40 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 57 मिनट पर होगा। तिथि कृष्ण प्रतिपदा 2 मई को पूरे दिन के साथ ही 3 मई को 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। नक्षत्र: विशाखा पूर्ण रात्रि तक रहेगी।

नारद जन्मोत्सव पर शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 14 मिनट से 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 56 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक और अमृत काल रात 9 बजकर 25 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 8 बजकर 59 मिनट से 10 बजकर 39 मिनट तक, यमगंड दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 38 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।