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कर्नाटक: शिक्षकों की कमी और स्कूलों में बदहाल व्यवस्था पर सीजेपी ने उठाए सवाल, शिक्षा मंत्री ने कार्रवाई का दिया भरोसा

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बेंगलुरु, 10 सितंबर (आईएएनएस)। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु के चार सरकारी स्कूलों का दौरा कर शिक्षकों की कमी, स्कूलों की जर्जर आधारभूत संरचना और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी रिपोर्ट कर्नाटक के शिक्षा मंत्री के समक्ष रखी, जिन्होंने मुद्दों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। सीजेपी के अनुसार, वार्थुर स्थित सरकारी उर्दू स्कूल में दौरे के अगले ही दिन मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया।

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका, राष्ट्रीय सचिव अफरीन नवाज और कर्नाटक टीम ने छात्रों, शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों से बातचीत कर कक्षाओं, शौचालयों और स्टाफ की स्थिति का जायजा लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सबसे गंभीर समस्या शिक्षकों को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) ड्यूटी पर भेजे जाने की है, जिससे स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

सीजेपी के अनुसार, वार्थुर के सरकारी उर्दू स्कूल में भवन की हालत बेहद जर्जर मिली। सरजापुर क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य के प्रयासों की सराहना की गई, लेकिन वहां नौ में से आठ शिक्षक एसआईआर ड्यूटी पर तैनात थे, जिससे पढ़ाई लगभग ठप हो गई।

प्रतिनिधिमंडल ने अगले दिन जिस अन्य सरकारी स्कूल का दौरा किया, वहां चार में से तीन शिक्षक एसआईआर ड्यूटी पर थे और शौचालयों की स्वच्छता बेहद खराब पाई गई। वहीं, जेपी नगर के सरकारी स्कूल में भवन और अन्य सुविधाएं अपेक्षाकृत बेहतर थीं, लेकिन वहां भी शौचालयों की स्थिति सुधारने की जरूरत बताई गई।

सीजेपी ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात के दौरान कहा कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की तैनाती से छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। प्रतिनिधिमंडल ने पर्याप्त वैकल्पिक शिक्षकों की नियुक्ति, अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था और स्कूलों में नियमित शिक्षण सुनिश्चित करने की मांग की।

बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य सरकार की कर्नाटक पब्लिक स्कूल्स पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित किया जाएगा।

सीजेपी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मॉडल स्कूलों के विकास के साथ-साथ मौजूदा सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, स्वच्छ शौचालय, नियमित रखरखाव और समय पर मरम्मत जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

संगठन ने उम्मीद जताई कि शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन जल्द जमीनी स्तर पर दिखाई देंगे और सरकारी स्कूलों में सुरक्षित कक्षाएं, स्वच्छ सुविधाएं तथा पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे।