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‘सीखना गलत नहीं, लेकिन डर का माहौल बनाना ठीक नहीं’, मराठी भाषा विवाद पर अबू आजमी

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मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रवासी मजदूरों और दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र आने वाले लोगों के सम्मान की वकालत की। उन्होंने कहा कि मराठी सीखना गलत नहीं है, लेकिन इसे अनिवार्य करने के नाम पर लोगों को धमकाना और टैक्सी-रिक्शा चालकों के साथ कथित तौर पर मारपीट या अपमान करना उचित नहीं है। ऐसे घटनाक्रम से लोगों के बीच डर का माहौल पैदा होता है।

इसके साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन के चित्रण को लेकर भी आपत्ति जताई। आजमी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों से आगे बढ़कर देश की जमीन की सुरक्षा पर ध्यान देने की अपील की। वहीं, गरबा में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर विश्व हिंदू परिषद के रुख पर उन्होंने कहा कि यदि किसी समुदाय को किसी धार्मिक आयोजन में शामिल होने से मना किया जा रहा है तो वहां जाने की जरूरत नहीं है।

मराठी भाषा को लेकर जारी विवाद पर अबू आसिम आजमी ने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों के लिए मराठी सीखना कोई गलत बात नहीं है। समस्या तब पैदा होती है जब भाषा को लेकर लोगों पर दबाव बनाया जाता है या उन्हें धमकाया जाता है। कुछ लोग भाषा विवाद का फायदा उठाकर टैक्सी और रिक्शा चालकों को निशाना बना रहे हैं और उन्हें अपमानित कर रहे हैं। ऐसे माहौल से दूसरे राज्यों से आए लोगों में भय पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा के कामकाज में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों से आए लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि ये लोग जमीनी स्तर के काम से लेकर बड़ी फैक्ट्रियों और उद्योगों तक में काम करते हैं। कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए सपा नेता ने कहा कि उस दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांव लौट गए थे और प्रदेश में निर्माण कार्य प्रभावित हुए थे।

उन्होंने सवाल किया कि अगर प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र छोड़कर चले जाएं तो क्या राज्य को उनकी जरूरत नहीं होगी। आजमी ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में रहने वाला व्यक्ति अपनी पसंद की जगह पर काम करने और रहने का अधिकार रखता है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि राज्यों के बीच इस तरह के विवादों को बढ़ाने के बजाय रोजगार के अवसर पैदा किए जाने चाहिए। यदि स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त नौकरियां हैं तो उन्हें उपलब्ध कराई जानी चाहिए, लेकिन बाहर से आए लोगों को अपमानित करना या उनमें डर पैदा करना देश के हित में नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन के चित्रण को लेकर आजमी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और नक्शे में उसके साथ अलग तरह का चित्रण किया जाना भारत के लिए अन्यायपूर्ण है। भारत की जमीन और राज्यों की स्थिति को सही तरीके से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वह मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों से आगे बढ़कर देश की सीमाओं और जमीन की सुरक्षा पर ध्यान दें। भारत के क्षेत्रीय हितों की रक्षा करना प्राथमिकता होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के भू-भाग से जुड़े किसी भी गलत चित्रण का विरोध किया जाना चाहिए।

गरबा आयोजनों में मुसलमानों की भागीदारी को लेकर वीएचपी के रुख पर आजमी ने कहा कि सभी समुदायों को एक-दूसरे के त्योहारों और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। यदि किसी आयोजन में ऐसी गतिविधियां हों जिन्हें मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करना उचित नहीं माना जाता, तो मुस्लिमों को उनमें शामिल होने की जरूरत नहीं है। आपसी दोस्ती, मेल-जोल और सामाजिक संबंध बने रहने चाहिए, लेकिन हर धार्मिक आयोजन में शामिल होना आवश्यक नहीं है। यदि वीएचपी भी मुस्लिमों को गरबा में शामिल होने से मना कर रही है, तो ऐसे में मुस्लिमों के वहां जाने का कोई औचित्य नहीं है।