बल्लारी, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की कथित कोशिश के मामले में भाजपा के बीएलए के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। भाजपा के एक बूथ लेवल एजेंट-1 (बीएलए-1) और तीन अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम गैरकानूनी तरीके से हटाने की कोशिश करने का आरोप है।
एफआईआर के मुताबिक, बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद और भाजपा बीएलए-1 श्रीनिवास मोटकर ने बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट से 7,561 वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन जमा किए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन आवेदनों में शामिल 98.08 प्रतिशत वोटर अल्पसंख्यक समुदाय से थे। एफआईआर में यह भी आरोप है कि मोटकर ने फॉर्म-7 के जरिए आवेदन जमा किए जबकि एसआईआर प्रक्रिया के तहत एक बीएलए द्वारा जमा किए जा सकने वाले आवेदनों की संख्या पर पाबंदी है।
इस मामले में बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के असिस्टेंट कमिश्नर नंदिश, बीएलओ सुमालता और केस वर्कर शरणबसवा का भी नाम शामिल हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने इस प्रक्रिया में मिलीभगत की और आवेदनों को जमा करने और उन पर कार्रवाई करने में मदद की। शिकायत में आरोप है कि आरोपियों ने चुनाव अधिकारियों को गलत जानकारी देकर वोटर लिस्ट से नाम हटवाने की कोशिश की। उनका मकसद वोटरों के अधिकारों को प्रभावित करना और समुदायों के बीच बंटवारा पैदा करना था। केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
इससे एक दिन पहले कर्नाटक के बेलगावी में वोटर लिस्ट से 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप भाजपा नेता पर था, जिसको सशर्त जमानत दे दी गई थी। कर्नाटक के बेलगावी में एसआईआर के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मामले में सियासी घमासान मचा हुआ है। इस मामले में भाजपा नेता डॉ. रवि पाटिल को गिरफ्तारी से राहत मिली थी।
बेलगावी की दूसरी अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दी थी। दरअसल, डॉ. रवि पाटिल पर 198 मुस्लिम वोटर्स के नाम एसआईआर के जरिए डिलीट कराने का आरोप लगा था। इस मामले में डॉ. रवि पाटिल समेत 20-25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
