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मदरसों को टारगेट करना बंद करें, कमी है तो नोटिस दें, बच्चों को न डराएं : कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद

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भोपाल, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में मदरसों के औचक निरीक्षण पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बाल आयोग की अध्यक्ष और अधिकारियों को निरीक्षण का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन कमियां मिलने पर प्रबंधन को नोटिस देना चाहिए, टारगेटिंग वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के नाम पर भय का माहौल बनाकर बच्चों को डराया जा रहा है और मीडिया में ‘आपत्तिजनक किताबें’ कहकर दुष्प्रचार किया जा रहा है।

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा, “ये मदरसों को टारगेट करने का जो सिलसिला चला है, यह रुकना चाहिए। बाल विकास की अधिकारी जाती हैं, औचक निरीक्षण करती हैं, उनकी अध्यक्ष भी अचानक निरीक्षण करती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्हें संवैधानिक अधिकार है, उन्हें जाना चाहिए, लेकिन निरीक्षण करके यदि वहां कमियां पाई जाती हैं, तो उसके लिए वहां के प्रबंधन को नोटिस देना चाहिए। कम से कम टारगेट वाली भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि बच्चों को पकड़वाते हैं। बच्चे अपने पेरेंट्स के लिखे हुए शपथ पत्र के आधार पर मदरसों में आते हैं। मदरसे और गुरुकुल की प्रक्रिया बहुत पुरानी चली आ रही है, कोई आज की नहीं है। पहले से यह व्यवस्था चली आ रही है और पढ़ाई होती रही है। आर्टिकल 29 के तहत उन्हें संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं। फिर ऐसा क्यों किया जा रहा है, मैं समझ नहीं पा रहा हूं। आज आप टारगेट करते हैं, एकदम भय का माहौल बनाते हैं, बच्चों को डराते हैं। वहां के जिला प्रशासन ने कम से कम समझदारी दिखाई। आप उनकी कमियां निकालिए, उन्हें नोटिस दीजिए, सुधार की बात कीजिए, लेकिन बेवजह बच्चों को परेशान मत कीजिए।

उन्होंने कहा कि मैं वहां के शहर काजी, ग्वालियर को, वहां की जिला वक्फ कमेटी को, भीम आर्मी को, आजाद पार्टी को मुबारकबाद दूंगा। कम से कम सभी ने मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। चार दिन बाद बच्चे रिहा हो गए। अन्यथा वे तो पूरी तरह घबराहट में आ जाते। यह प्रक्रिया रुकनी चाहिए। इस तरह का प्रचार नहीं होना चाहिए। अच्छी संस्थाएं अच्छा काम करती हैं। आप बच्चों में सुधार लाने के लिए वहां हैं। यदि कोई कमी है तो प्रबंधन से कहिए, नोटिस दीजिए कि व्यवस्था सुधारें, बाथरूम कम हैं तो बढ़ाइए, अंग्रेजी शिक्षा का स्तर कमजोर है तो उसे बेहतर कीजिए, खाने की व्यवस्था में सुधार कीजिए। यदि आप ऐसा करेंगी तो संस्था के साथ न्याय करेंगी, लेकिन यदि एक मानसिकता के तहत उन्हें टारगेट करेंगी तो यह उचित नहीं होगा।

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस पर टिप्पणी की है। प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार ने कहा है कि हम इस मुद्दे पर उनके साथ हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी का चरित्र उजागर हो गया है। डर और भय की राजनीति सामने आ गई है। मध्य प्रदेश में उन्हें कोई अच्छा व्यक्ति नहीं मिला जिसे भेजते, इसलिए ऐसे व्यक्ति को भेजने का निर्णय लिया गया। इससे यह सवाल उठता है कि भारतीय जनता पार्टी किस दिशा में जा रही है।