भोपाल 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के मंत्री हैं और विधायकों की कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, सजग और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए आगामी दिसंबर माह में मंत्रियों और विधायकों के साथ मंथन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में फोर्थ नेशनल कांफ्रेंस फॉर एचआर-सीएसआर ‘अभ्युदय’ को संबोधित करते हुए कहा कि “अभ्युदय 2026” का यह सत्र सुशासन, प्रशासनिक दक्षता और अतीत के सफल अनुभवों से सीख लेते हुए भविष्य की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के माध्यम से इस सत्र को सार्थक रूप दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार समय-समय पर इस प्रकार के आयोजन करती रहती है, ताकि विभिन्न विषयों पर गहन मंथन के माध्यम से प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, सजग और परिणामोन्मुखी बनाया जा सके। इसी क्रम में आगामी दिसंबर माह में मंत्रियों और विधायकों के साथ भी इसी प्रकार का मंथन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि जहां गीता समाप्त होती है, वहीं से जीवन का अभ्युदय प्रारंभ होता है। हमारे समाज के लिए एक आदर्श है भगवान श्री कृष्ण का पूरा जीवन। हम सब उनके जीवन से प्रतिदिन कुछ न कुछ सीखते ही हैं। उन्होंने अपना सारा जीवन चुनौतियों के बीच व्यतीत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण तत्कालीन लोकतांत्रिक परम्पराओं के सच्चे और महान नायक थे। उन्होंने जीवन की हर परिस्थिति में अपना मानव धर्म और राजधर्म निभाया। उन्होंने एक सर्वशक्तिमान सत्ताधीश कंस का वध तो किया , परन्तु खुद उसकी सत्ता पर आसीन नहीं हुए। उन्होंने कभी खुद को राजा कहलाना पसंद नहीं किया। सुदामा के साथ मित्रता का सदैव मान रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में जहां-जहां भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरण पड़े, उन स्थानों को श्री राम वन गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय का निर्माण कर इन्हें श्रीराम तीर्थ और श्रीकृष्ण तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है। भगवान श्रीकृष्ण सहित सभी देवी-देवताओं के व्यक्तित्व के उस पक्ष पर मंथन की जरूरत है, जब उनके जीवन में चुनौतियां आईं और किस प्रकार से उन्होंने मानव समाज के कल्याण के लिए मार्ग निकाला।
उन्होंने कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ। उनके माता-पिता और स्वयं उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन में अनेक कष्ट सहे। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण अपने संकल्पों पर अडिग रहते थे। उन्होंने यशोदा मैया को वचन दिया था कि जब कंस को मारकर मथुरा से लौटूंगा तो आपके हाथ से माखन खाऊंगा, लेकिन जब कारागार में मैया देवकी से मिले और उन्होंने कन्हैया को माखन खिलाना चाहा, तो श्रीकृष्ण ने साफ इनकार कर दिया, क्योंकि वह माता यशोदा को उनके हाथ से माखन खाने का वचन दे चुके थे। ऐसे अनेक प्रसंग हमें प्रेरणा देते हैं कि हमेशा समाज को साथ लेकर कैसे आगे बढ़ें। भगवान श्रीकृष्ण ने मोर पंख को सिर पर धारण कर प्रकृति पूजा की संस्कृति को प्रोत्साहन प्रदान किया।
–आईएएनएस
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