मध्य प्रदेश में किसानों को चार गुना मुआवजा देने पर कांग्रेस- भाजपा आमने-सामने

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भोपाल, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित किए जाने की स्थिति में मुआवजे की राशि चार गुना की है। सरकार के फैसले पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल, राज्य की मोहन यादव सरकार ने कृषि भूमि के भूअर्जन पर गुणन कारक (मल्टीफिकेशन फैक्टर) को दोगुना करते हुए 2.0 कर दिया गया है।

इससे अब अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा किसानों को दोगुना के स्थान पर बाजार दर से चार गुना प्राप्त होगा। यह निर्णय संपूर्ण प्रदेश की ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के अधिग्रहण पर लागू होगा। सरकार की फैसले पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भू अधिग्रहण कानून के मध्य प्रदेश में 12 साल देरी से लागू होने पर प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

चौधरी ने कहा कि जो कानून मनमोहन सिंह और राहुल गांधी की मंशानुसार पूरे देश में एक जनवरी 2014 को लागू किया गया था, वह कानून 12 साल तक मध्य प्रदेश में लागू न करके भाजपा सरकार ने किसानों के साथ बड़ा धोखा किया है। चौधरी ने प्रदेश सरकार से पूछा कि इन बारह सालों में रतलाम सिक्स लेन एवं इंदौर देवास रोड जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए हजारों किसानों की जमीन का अधिग्रहण औने पौने दामों में किया गया इन किसानों के साथ हुए अन्याय की भरपाई कौन करेगा?

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव चौधरी ने मांग की कि इन किसानों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए तथा इन्हें दिए धोखे पर भाजपा सरकार माफी मांगे। वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ हितेश वाजपेई ने मध्यप्रदेश सरकार के फैसले को किसानों के हित में लिया गया फैसला करार देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्णय लिया कि अब सरकारी परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण पर कलेक्टर रेट का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

ये वो बड़ा कदम है जो पहले कभी नहीं हुआ। किसानों का हित सर्वोपरि। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम लिए बगैर वाजपेई ने कहा जब जेवी भाई के डैडी मुख्यमंत्री थे, तब भी ऐसा साहसिक फैसला नहीं लिया गया था। मोहन यादव ने किसानों के हक में जो ऐतिहासिक निर्णय लिया है, वो मिसाल है।

–आईएएनएस

एसएनपी/पीएम