भोपाल, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की मोहन यादव सरकार पर अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में निष्क्रिय रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही ओबीसी आरक्षण संबंधी सुनवाई को लेकर राज्य सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का मामला लाखों युवाओं, अभ्यर्थियों, छात्रों और परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा सरकार की निष्क्रियता अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पटवारी ने कहा कि वर्ष 2019 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। यह निर्णय सामाजिक न्याय और पिछड़ा वर्ग समाज को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। किंतु उसके बाद से यह मामला विभिन्न कानूनी याचिकाओं में उलझा हुआ है और भाजपा सरकार इसे गंभीरता से हल कराने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने राज्य सरकार की याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में स्थानांतरित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि तीन महीने के भीतर इस मामले का निपटारा किया जाए। वर्तमान में निर्धारित समय का आधा हिस्सा बीत चुका है, लेकिन सरकार की सक्रियता अब भी नजर नहीं आ रही है।
उन्होंने आगे कहा है कि उच्च न्यायालय में सुनवाई की तारीख और समय पहले से तय था, फिर भी सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दी। इतना महत्वपूर्ण विषय होने के बावजूद राज्य के विधि अधिकारियों, विशेष रूप से एडवोकेट जनरल का व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न होना सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
पटवारी ने कहा कि सैकड़ों-हजारों अभ्यर्थी वर्षों से अपनी नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सात वर्षों से ओबीसी आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाना राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। यदि सरकार वास्तव में पिछड़ा वर्ग समाज के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध होती, तो वह न्यायालय में पूरी तैयारी और मजबूती के साथ अपना पक्ष रखती।
उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णायक समय में सरकार का ढीला रवैया लाखों युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है।

