लखनऊ, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। लखनऊ में गुरुवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक विशेष एक-दिवसीय सत्र आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 131वें संविधान संशोधन विधेयक की हार के संबंध में निंदा प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इस सत्र का मुख्य फोकस ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर केंद्र सरकार के प्रयासों और विपक्ष की भूमिका पर रहेगा। सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने विधायिकाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देकर उनके लिए बहुत अच्छा काम किया है। हालाँकि, समाजवादी पार्टी इस विधेयक के कार्यान्वयन का विरोध कर रही है और संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने में बाधाएँ डालने की कोशिश कर रही है। यह स्वीकार्य नहीं है।”
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जो विरोधी दल, चाहे वह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी हो या इंडी गठबंधन के अन्य दल- इनका आचरण महिला विरोधी है और इन्होंने महिलाओं को 2029 में मिलने वाले आरक्षण से वंचित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयास था कि 2029 में संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिले, लेकिन इन्होंने इसे होने नहीं दिया। जनता इसका जवाब देने के लिए तैयार बैठी है।”
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी समाज को गुमराह करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती है। देश के सदन में जब मातृशक्ति के लिए खड़े होने की बात आई, जब उन्हें सशक्त करने की बात आई, तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भाग खड़ी हुईं। देश की मातृ शक्ति ने देखा कि एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा किस तरह नारी शक्ति को सशक्त करना चाहते हैं, दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और विपक्ष इसमें कैसे अवरोध पैदा करना चाहते हैं।”
मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा, “विपक्ष, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य पार्टियों ने महिला आरक्षण का विरोध किया, इसे पारित नहीं होने दिया और इसके खिलाफ जश्न मनाया। आज इसके खिलाफ विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा और उन्हें बेनकाब किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि जिस तरह विपक्ष ने महिला आरक्षण के खिलाफ मतदान किया और विधेयक को पारित नहीं होने दिया, उससे यह ज़ाहिर होता है कि ये दल नहीं चाहते कि आम महिलाएं अपनी योग्यता के बल पर विधायक या सांसद बनें।

