हरारे, 26 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय लेग स्पिनर रवि बिश्नोई ने जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की टी20 सीरीज में अपने प्रदर्शन पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में अपने रन-अप से जुड़ी कमियों पर काम करने का फायदा अब मैदान पर नजर आ रहा है।
भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ यह सीरीज 3-0 से अपने नाम की। इसमें बिश्नोई का अहम योगदान रहा। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने 6 विकेट लिए।
इससे पहले इंग्लैंड दौरे पर बिश्नोई को अपनी गेंदबाजी में कुछ तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में उनकी तीन बैक-फुट नो-बॉल ने टीम को नुकसान पहुंचाया था और उन्हें 60 रन देने पड़े थे। इसके बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी की कमजोरियों को पहचानते हुए उनमें सुधार करने पर ध्यान दिया।
बिश्नोई ने बताया कि उन्होंने साईराज बहुतुले और सुनील जोशी जैसे अनुभवी कोचों के मार्गदर्शन में अपने रन-अप पर काफी काम किया। उनका रन-अप पहले सही दिशा में नहीं जा रहा था, जिसकी वजह से गेंदबाजी में नियंत्रण प्रभावित हो रहा था। उन्होंने कहा कि कोचों ने उन्हें जरूरी बदलाव समझाए और उन्हें सुधार करने में काफी मदद मिली।
उन्होंने कहा, “मैंने उन क्षेत्रों पर काम किया जिनमें सुधार की जरूरत थी क्योंकि मेरी गेंदबाजी में कुछ गलतियां थीं। मैंने उन पर मेहनत की और अब उसके नतीजे दिखाई दे रहे हैं। मुझे कोचों से काफी समर्थन मिला। उन्होंने मुझे बताया कि मुझे किन चीजों पर ध्यान देना है।”
बिश्नोई ने माना कि इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में वह अपनी सामान्य लाइन से थोड़ा ज्यादा बाहर जा रहे थे। आमतौर पर ऐसा नहीं होता, लेकिन उस मैच में दुर्भाग्य से यही समस्या बार-बार हुई।
हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिचों पर जहां स्पिन गेंदबाजों को ज्यादा टर्न नहीं मिल रहा था, वहां बिश्नोई ने अपनी स्किल का प्रदर्शन करते हुए विकेट निकाला।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में उनकी सीधी और तेज गेंदें बल्लेबाजों के लिए मुश्किल पैदा करती हैं। बड़े मैदानों को भी उन्होंने गेंदबाजों के लिए फायदेमंद बताया, क्योंकि वहां बल्लेबाजों के लिए बड़े शॉट लगाना आसान नहीं होता।
बिश्नोई के लिए यह दौरा आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहा, क्योंकि उन्होंने अपनी तकनीकी कमियों को दूर कर प्रभावशाली गेंदबाजी की। बिश्नोई इस सीरीज में भारत के मुख्य स्पिनर थे।

