मालेगांव धमाका केस: आरोपियों की रिहाई पर भड़के ओवैसी, एनआईए जांच पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मालेगांव में 2006 में हुए बम धमाकों के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा चार आरोपियों को बरी किए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले को लेकर एनआईए पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ओवैसी ने कहा कि 2006 में हुए मालेगांव धमाकों में 31 लोगों की मौत हुई थी और 312 लोग घायल हुए थे। उनका आरोप है कि यह हमला खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर किया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिन चार लोगों को बरी किया गया, वे कथित तौर पर ‘अभिनय भारत’ संगठन से जुड़े थे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में ओवैसी ने लिखा, “कल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 के मालेगांव धमाकों को अंजाम देने के आरोपी चार लोगों को बरी कर दिया। आरोप था कि ये सभी आरोपी ‘अभिनव भारत’ संगठन से जुड़े थे। इन धमाकों में 31 लोगों की जान चली गई थी और 312 लोग घायल हुए थे। इन धमाकों में खास तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाया गया था। फिर भी, शायद अपनी आदत के चलते, जांच एजेंसियों ने सबसे पहले नौ मुसलमानों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें आखिरकार 2016 में बरी कर दिया गया। कल के अपने आदेश में हाई कोर्ट ने एनआईए की लचर जांच की कड़ी आलोचना की।”

ओवैसी ने सवाल करते हुए कहा कि क्या एनआईए इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी? इसकी संभावना बहुत कम है। यह सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ एक तरह का विश्वासघात है। यह एक और ऐसा आतंकी हमला साबित होगा, जिसमें हम इसके दोषियों को सजा पाते हुए नहीं देख पाएंगे। भारत में एक मुसलमान होने का मतलब है। बस इंसाफ का इंतजार करते रहना।

ओवैसी ने इस मामले की तुलना 2008 के एक अन्य ब्लास्ट केस से करते हुए कहा, “इस मामले की कहानी भी 2008 के धमाकों वाले मामले जैसी ही रही है। एनआईए की सरकारी वकील रोहिणी सालियन ने तो रिकॉर्ड पर यह बात कही थी कि एनआईए ने उनसे आरोपियों के प्रति नरम रुख अपनाने को कहा था।”