अयोध्या, 17 जून (आईएएनएस)। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा लव जिहाद और लैंड जिहाद को लेकर दिए बयान पर अयोध्या के कई संतों और धर्माचार्यों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जगतगुरु परमहंस आचार्य, महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज और महंत सीताराम दास महाराज ने रामभद्राचार्य के विचारों का समर्थन करते हुए मथुरा, काशी और संभल को हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र बताया।
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि भारत सनातन संस्कृति का देश है और यहां की पहचान सनातन परंपरा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, “मथुरा, काशी और संभल हमारा ही है। भारत सनातनियों का देश है। दुर्भाग्यवश कुछ तुष्टीकरण करने वाली सरकारें, जैसे कांग्रेस आदि, सत्ता में रहीं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया। अन्यथा पूरा भारत सनातनियों का देश है। यहां के कण-कण में भगवान शंकर का आभास होता है। हर जगह मंदिर और शिवालय हैं। यहां इस्लाम का कोई संबंध नहीं है। इस्लाम 1400 वर्ष पहले आया, जबकि सनातन सृष्टि के आरंभ से है। इस्लाम की उत्पत्ति भी यहां नहीं हुई। पैगंबर मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था। इसलिए यदि स्वदेशी और विदेशी उपासना की बात करें, तो इस्लाम और ईसाईयत विदेशी उपासना पद्धतियां हैं। आदरणीय तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी ने जो कहा है कि ‘लेकर रहेंगे’, वह हमारा है और इसे विधिक रूप से प्राप्त किया जाना चाहिए। उनके इस प्रयास का हम समर्थन करते हैं।”
वहीं, महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि मथुरा, काशी और संभल हिंदू समाज की आस्था के केंद्र हैं और उन्हें लेकर जो भी वैधानिक प्रक्रिया होगी, उसमें समाज अपना पक्ष रखेगा। उन्होंने कहा, मथुरा, काशी और संभल हमारा था, है और रहेगा। यदि इसके लिए न्यायालय जाना पड़े या अन्य संवैधानिक प्रयास करने पड़ें, तो हम सभी वह प्रयास करेंगे। हम संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे। किसी भी प्रकार की हिंसा या क्रूरता का समर्थन नहीं किया जाएगा।
लैंड जिहाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर मजार बनाकर और बाद में वहां बड़े निर्माण किए जाते हैं, जिससे अराजकता के हालात पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को कठोर निर्णय लेते हुए दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं, महंत सीताराम दास महाराज ने भी रामभद्राचार्य के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मथुरा, काशी और संभल जैसे धार्मिक स्थल सनातन संस्कृति की पहचान हैं। उन्होंने कहा, “जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने जो कहा है, वह पूरी तरह सही है। ये सभी स्थल सनातनियों की महान आस्था के केंद्र हैं। उनके मार्गदर्शन में सनातनी समाज काशी, मथुरा और संभल को लेकर अपने संकल्प को आगे बढ़ाएगा। यही भारत और भारतीय संस्कृति की पहचान है।” उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी प्रकार भविष्य में अन्य धार्मिक स्थलों के संबंध में भी समाज अपनी आस्था और अधिकारों को लेकर प्रयास करता रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सब संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
दरअसल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि मथुरा, काशी और संभल को भी प्राप्त किया जाएगा।

