Tuesday, July 14, 2026
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विधायक मजीबुर रहमान ने छठी अनुसूची को लागू करने की वकालत, घुसपैठियों पर बोले, बेवजह लोगों को परेशान करना गलत

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गुवाहाटी, 14 जुलाई (आईएएनएस)। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक मजीबुर रहमान ने छठी अनुसूची को लागू करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जिस तरह से घुसपैठियों के नाम पर यहां के आम लोगों को परेशान किया जा रहा है, वो गलत है। इस तरह की प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि छठी अनुसूची को लागू किया जाना चाहिए। ग्रामीणों की ओर से इस संबंध में मांग की जा रही है, लिहाजा मेरा सरकार से यही कहना है कि वो इन मांगों पर विचार करें और स्थिति को कैसे सकारात्मक करना है, इस दिशा में भी कदम बढ़ाया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का यह संवैधानिक अधिकार है। ऐसी स्थिति में इन लोगों को यह संवैधानिक अधिकार दिया जाना चाहिए। अगर अभी तक नहीं दिया गया है, तो इस पर विचार विमर्श करना चाहिए कि आखिर अब तक इस संबंध में क्यों कोई ठोस फैसला नहीं किया गया है। लेकिन, अफसोस की बात है कि कुछ लोग छठी अनुसूची का जिक्र करके कुछ लोग इसका राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

वहीं, असम में अभी 1692 लोगों को बांग्लादेशी नागरिक के रूप में चिन्हित किया गया है। इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर विधायक मजीबुर रहमान ने कहा कि निश्चित तौर पर इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन, हमारा यही कहना है कि जिन पात्र नागरिकों को लगातार बांग्लादेशी होने के नाम पर परेशान किया जा रहा है, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करके उन्हें बाहरी होने का एहसास दिलाया जा रहा है, वो गलत है। हम लोग लगातार इसी को लेकर अपनी आवाज को बुलंद करने का काम कर रहे हैं।

इसके अलावा, उन्होंने मूल नागरिकों को चिन्हित करने की दिशा में अपनाई जा रही प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, छोटी-सी भी गलती पाए जाने पर लोगों को बांग्लादेशी बताया जा रहा है। राज्य में रहने वाले लोगों की पहचान अच्छे से नहीं हो रही है। छोटी-सी भी गलती पाए जाने पर उसे बांग्लादेशी बताया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से गलत है। यह अफसोस की बात है कि एक छोटी सी गलती होने पर किसी भी नागरिक को बांग्लादेशी ठहराया जा रहा है। इसी को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप किया और कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ नाम में सुधार करने के नाम पर किसी को बांग्लादेशी नहीं कहा जा सकता है।