नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) में विभिन्न श्रेणियों में 2,345 अतिरिक्त पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य दिल्ली की अग्निशमन और आपातकालीन बचाव सेवाओं को मजबूत करना है।
1942 में स्थापित इस विभाग के 84 साल के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर कैडर पुनर्गठन किया जा रहा है। इस निर्णय के साथ विभाग में स्वीकृत पदों की कुल संख्या 3,096 से बढ़कर 5,441 हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जान बचाने के लिए शहर की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप अग्निशमन सेवा को मजबूत करना आवश्यक था।
पुनर्गठन के तहत, उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी, संभागीय अधिकारी, सहायक संभागीय अधिकारी, स्टेशन अधिकारी, सब-ऑफिसर, लीडिंग फायरमैन, फायर ऑपरेटर, चपरासी और माली सहित विभिन्न रैंकों और श्रेणियों में पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इससे वरिष्ठ पर्यवेक्षणीय पदों से लेकर अग्निशमन एवं बचाव कार्यों में लगे अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों तक, हर स्तर पर कर्मियों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे विभाग की संगठनात्मक संरचना को सुव्यवस्थित करने, विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों का बेहतर निर्वहन सुनिश्चित करने और आपात स्थितियों के दौरान इसकी कार्यकुशलता में सुधार करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की तेजी से बढ़ती आबादी, विस्तारित शहरी क्षेत्र, घनी आबादी वाली बस्तियां, ऊंची इमारतें, औद्योगिक प्रतिष्ठान और जटिल बुनियादी ढांचा अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। आग या किसी भी अन्य आपदा की स्थिति में हर मिनट मायने रखता है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त प्रशिक्षित जनशक्ति, एक मजबूत नेतृत्व संरचना और त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता लोगों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगर में अग्निशमन सेवा की भूमिका केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है। आग लगने की घटनाओं के अलावा, विभाग दुर्घटनाओं, आपात स्थितियों और बचाव कार्यों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए हर स्तर पर पर्याप्त जनशक्ति और एक मजबूत कमान संरचना सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि 2,345 अतिरिक्त पदों का सृजन केवल कार्यबल बढ़ाने का निर्णय नहीं है, बल्कि दिल्ली की सार्वजनिक सुरक्षा, संस्थागत क्षमता और भविष्य की आवश्यकताओं में एक महत्वपूर्ण निवेश है।
दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षित कैडर पुनर्गठन से विभाग को एक मजबूत संस्थागत आधार मिलेगा और वह अग्निशमन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया संबंधी अपनी जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकेगा। जन सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की बदलती जरूरतों और बढ़ते अग्नि जोखिमों को देखते हुए, अग्निशमन सेवा के पास पर्याप्त जनशक्ति, एक मजबूत पर्यवेक्षी ढांचा और हर स्थिति से निपटने की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहल पर लिया गया यह निर्णय दिल्ली को एक सुरक्षित, आपदा-प्रतिरोधी राजधानी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अपने नागरिकों के प्रति अधिक जवाबदेह है।
दिल्ली अग्निशमन सेवा की स्थापना 1942 में मात्र चार फायर स्टेशनों, 14 अग्निशमन वाहनों और उपकरणों तथा 186 कर्मियों के साथ हुई थी। 1970 तक फायर स्टेशनों की संख्या बढ़कर 14 हो गई थी। आज विभाग के पास मुख्यालय और प्रशिक्षण केंद्र सहित 71 फायर स्टेशनों का नेटवर्क है। इसका कार्यक्षेत्र लगभग 1,484 वर्ग किलोमीटर है। दिल्ली की बढ़ती जनसंख्या, शहरी क्षेत्रों के विस्तार और अग्नि सुरक्षा चुनौतियों में वृद्धि के साथ, विभाग की जिम्मेदारियां भी काफी बढ़ गई हैं। इस पृष्ठभूमि में, बड़े पैमाने पर कैडर पुनर्गठन विभाग के 84 साल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इन अतिरिक्त पदों की मंजूरी से इसकी संगठनात्मक संरचना और मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी।

