Thursday, August 6, 2026
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मुंबई: आदित्य ठाकरे ने सीएम फडणवीस को लिखा पत्र, सार्वजनिक जमीन संस्था को आवंटित करने का किया विरोध

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मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। इस पत्र में आदित्य ठाकरे ने मुंबई की लगभग 16 एकड़ सार्वजनिक खुली जमीन एक संस्था को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है।

इस पत्र में आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और म्हाडा के माध्यम से सार्वजनिक जमीनों का हस्तांतरण किया जा रहा है और मुख्यमंत्री से इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर बीएमसी और म्हाडा के जरिए उनकी पार्टी द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को रोकने की मांग की है। मुंबई की 16 एकड़ खुली जगह एक भाजपा एमएलसी को सौंपी जा रही है। इनमें से दो भूखंड मुफ्त और एक बेहद कम कीमत पर दिया जा रहा है। यह बंद होना चाहिए। मुंबईकर इस शर्मनाक भूमि कब्जे के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे।”

आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से अंधेरी (पश्चिम) और जुहू स्थित तीन सार्वजनिक खुले भूखंडों के लिए श्री विले पार्ले केलवाणी मंडल (एसवीकेएम) को जारी एनओसी और आवंटन रद्द करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि बीएमसी और म्हाडा द्वारा एसवीकेएम को लगभग 16 एकड़ जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव है। यह भूमि वर्तमान में आम नागरिकों द्वारा बगीचे, खेल मैदान, मनोरंजन स्थलों और पर्यावरणीय संपत्ति के रूप में उपयोग की जा रही है।

पत्र के अनुसार, प्रस्तावित आवंटन में तीन भूखंड शामिल हैं। ये भूखंड अंधेरी पश्चिम स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डीएन नगर स्थित पूर्व म्हाडा सीमेंट गोदाम परिसर और जुहू स्थित लोकमान्य तिलक उद्यान हैं।

आदित्य ठाकरे ने अपने पत्र में कहा कि गुलमोहर एरिया सोसाइटीज वेलफेयर ग्रुप, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इन भूखंडों को सार्वजनिक खुले स्थान के रूप में सुरक्षित रखा जाए और आम लोगों की पहुंच बनी रहे।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि इन तीनों भूखंडों से संबंधित एनओसी और आवंटन तत्काल रद्द किए जाएं। साथ ही बीएमसी और म्हाडा सहित संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया जाए कि इन जमीनों को सार्वजनिक हित में संरक्षित रखा जाए और नागरिकों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित की जाए।