उत्तराखंड, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड की वादियों में बसा नैनीताल जिला अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन यहां की आध्यात्मिक विरासत भी उतनी ही समृद्ध है। इसी जिले के प्रसिद्ध नौकुचियाताल क्षेत्र में स्थित ‘हनुमान मंदिर भक्ति धाम’ भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
नौ झीलों से घिरे नौकुचियाताल की शांत और मनोरम घाटी के बीच स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि मानसिक शांति के लिए भी कारगर है। इस पावन धाम में श्री हनुमान जी के साथ-साथ भव्य राम दरबार, शनिदेव का मंदिर और नीम करोली बाबा तथा भक्ति मां (मौनी माई) के मंदिर भी स्थित हैं।
कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। पहाड़ों, झील और हरियाली के बीच बसा यह धाम हर साल सैकड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
यह धाम ‘भक्ति धाम ट्रस्ट’ द्वारा संचालित होता है। इसकी प्रेरणा और जुड़ाव नीम करोली बाबा और भक्ति मां से जुड़ा हुआ है। इस धाम का इतिहास यहां की महिला श्रद्धालु से जुड़ा है, जिन्हें स्थानीय लोग ‘भक्ति मां’ या ‘मौनी माई’ के नाम से जानते हैं। वह कैंची धाम के प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा की परम भक्त थीं। उन्होंने वर्ष 1951 से लेकर 2013 में अपने महाप्रयाण तक लगभग 62 वर्षों तक मौन व्रत धारण किया था। उनकी स्मृति और उनके द्वारा क्षेत्र में किए गए जन-कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए ‘भक्ति धाम ट्रस्ट’ की स्थापना हुई।
इस मंदिर परिसर में भगवान हनुमान जी की 52 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो दूर से ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। इस पावन धाम के भीतर भव्य राम दरबार, शनिदेव का मंदिर, नीम करोली बाबा का मंदिर, भक्ति मां की प्रतिमा और माता वैष्णो देवी की गुफा भी स्थित है। इस ट्रस्ट के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों और स्कूल के बच्चों को गर्म कपड़े, जूते और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित करने जैसे कई सामाजिक व परोपकारी कार्य किए जाते हैं।
