नीट पेपर लीक केस: विपक्ष ने केंद्र को घेरा, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का लगाया आरोप

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नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। पेपर लीक होने की वजह से नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र और एनटीए का घेराव किया। उन्होंने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव नहीं किए जाते और पेपर लीक को रोकने का कोई ठोस तरीका नहीं निकाला जाता, तब तक बेहद सावधानी से काम करने की जरूरत है। अब यह मामला सीबीआई के पास है। हम देखेंगे कि सीबीआई क्या करती है। इतनी बड़ी परीक्षा का पेपर लीक होना बेहद चिंता का विषय है। जो छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, उन्हें गहरी निराशा हो रही है।”

‘आप’ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “जिस तरीके से नीट का पेपर हर साल लीक हो रहा है, उससे साफ है कि सरकार को इन बच्चों की कोई चिंता नहीं है। लाखों बच्चों ने इस परीक्षा की तैयारी की थी। वे बच्चे और उनके परिवार अब कहां जाएंगे? किसी एग्जाम की तैयारी मजाक नहीं होती।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछली बार पेपर लीक करने वालों को थोड़े दिन जेल में रखकर छोड़ दिया गया। इसका मतलब है कि सरकार की उनसे मिलीभगत है। मुझे 18 महीने जेल में रखा गया, जबकि बच्चों के भविष्य के साथ खेलने वालों को तुरंत बाहर निकाल दिया जाता है। सरकार द्वारा बनाई गई एनटीए पूरी तरह फेल हो चुकी है। वे देश के बच्चों और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।”

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह जेन-जी का मुद्दा है। “नेपाल में जेन-जी ने जो किया, वह सबके सामने है। जब जेन-जी अपने आप में आता है तो सत्ता में बैठे लोगों को खदेड़ देता है। सरकार को जेन-जी के भविष्य से नहीं खेलना चाहिए।”

एनसीपी (एसपी) नेता फहाद अहमद ने मुंबई से कहा, “आपको इस बारे में सोचना चाहिए कि आप बच्चों की उम्मीदों को कैसे खत्म कर रहे हैं। गांवों में छोटे-छोटे बच्चे डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। उनके माता-पिता भी यही सोचते हैं। आपने शिक्षण संस्थानों को बर्बाद कर दिया है और उनकी विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो रही है।”