Monday, June 8, 2026
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नेरियमंगलम: प्रकृति की गोद में छिपा है रहस्यमयी गांव, वाटरफॉल और मसालेदार पेड़-पौधे का ले पाएंगे अनुभव

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। जून की छुट्टियों का मौसम शुरू होने वाला है और अगर आप एक साथ सुकून और प्रकृति की मनमोहक छटा का नजारा लेना चाहते हैं, तो हम आपके लिए केरल की ऐसी जगह की जानकारी लेकर आए हैं, जो अपनी प्रकृति, वाटरफॉल, और मसालेदार पेड़-पौधों के लिए मशहूर है।

यहां आकर प्रकृति के सुंदर नजारों के साथ दक्षिण भारत का पहला मेहराबदार पुल भी देखने को मिलेगा, जिसका बहुत पुराना इतिहास भी है।

केरल के एर्नाकुलम/इडुक्की सीमा क्षेत्र में प्रकृति की गोद में छिपा एक नेरियमंगलम नाम का गांव है, जो ऊंचे और हरे-भरे पहाड़ से घिरा है। यहां बड़े झरने से लेकर रबर के लंबे और विशाल पेड़ भी देखने को मिल जाएंगे। सबसे खास बात है कि इस गांव नेरियमंगलम को पार करते ही आपको तापमान में बदलाव भी महसूस होगा। इसे “मुन्नार का प्रवेश द्वार” कहा जाता है। नेरियमंगलम गांव पेरियार नदी के तट पर स्थित है, जहां हरे-भरे रबर के बागानों, मसालों के बगीचों दो बड़े वाटरफॉल चीयप्पारा और वलारा देखने को मिलेंगे, जहां दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।

केरल की प्रमुख भाषा मलयालम में नेरियमंगलम का अर्थ है “नेरियम का गाँव।” यहां नेरियम का अर्थ है वहां की प्रकृति में पाया जाने वाला पेड़, और मंगलम का अर्थ है शुभ और सौभाग्य लेकर आना। यहां आसानी से इलायची, काली मिर्च, वनीला, लौंग जायफल और दालचीनी के पेड़ मिल जाते हैं। यहां रबर के पेड़ों की भी खेती होती है, लेकिन यहां के वातावरण के हिसाब से सबसे ज्यादा खेती मसालों की होती है और फिर पूरे भारत में इसे बेचा जाता है।

दो बड़े वाटरफॉल, चीयप्पारा और वलारा, प्रकृति के बीचों-बीच बसे झरने हैं, जो कोच्चि-मुन्नार राजमार्ग पर पड़ते हैं। चीयप्पारा एक इको-टूरिज्म प्लेस है, जहां 1000 फीट से अधिक के ऊंचे पहाड़ से जल तेजी से नीचे गिरता है और तेज आवाज आती है। पानी बिल्कुल साफ और ठंडा होता है। जून से सितंबर के मध्य पानी का स्तर बढ़ जाता है और अधिक संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं जबकि वलारा एक छोटा झरना है, जो मानसून के दौरान ही दिखता है।

बात अगर नेरियमंगलम के मेहराबदार पुल की करें, तो यह फुल एर्नाकुलम और इडुक्की के बीच एक बड़े मार्ग का काम करता है। खास बात यह है कि पुल को पार करते ही आपको अलग जलवायु और तापमान का अहसास होगा। इस पुल का निर्माण 1935 में त्रावणकोर के महाराजा ने करवाया था। आज इस पुल के पास कई स्टे हाउस देखने को मिल जाते हैं। यहां आपको खाने में मुख्य रूप से काली मिर्च का स्वाद जरूर चखने को मिलेगा। इसके साथ ही अप्पम, पुट्टू और कडाला करी, मसालेदार और कुरकुरी मछली और चावल खाने को मिल जाएंगे।