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नियोजित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करे सरकार: तेजस्वी यादव

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पटना, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर राज्य के नियोजित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में तत्काल पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और प्रभावित शिक्षकों की सेवा समाप्ति तथा वेतन रोकने जैसी कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

तेजस्वी यादव ने पत्र में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 28 जुलाई 2026 के आदेश और प्राथमिक शिक्षा निदेशक के एक अक्टूबर 2026 के पत्र के बाद बिहार के हजारों नियोजित शिक्षकों सहित 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इससे वर्ष 2015-16 में नियुक्त उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों के बीच भी भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों का नियोजन कोई नई प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि वर्ष 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में न्यायिक आदेशों और विभागीय निर्देशों के अनुपालन में हुआ था। ऐसे में केवल 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्ति होने के आधार पर इन शिक्षकों को सेवा समाप्ति के दायरे में रखना उचित नहीं है।

राजद नेता ने कहा कि प्रभावित शिक्षकों में कई ऐसे हैं, जो प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं और वर्तमान में विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक अथवा विद्यालय अध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने इनकी वर्तमान योग्यता और नियुक्ति को ध्यान में रखते हुए संरक्षण देने की मांग की।

तेजस्वी ने कहा कि वर्षों से सरकारी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों के नियोजन अभिलेख या मेधा सूची में कमी होने पर उसकी जिम्मेदारी संबंधित नियोजन इकाइयों की है। प्रशासनिक त्रुटियों की सजा शिक्षकों और उनके परिवारों को देना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने सरकार से पुनर्विचार याचिका पर निर्णय आने तक वेतन रोकने, सेवा समाप्त करने और बर्खास्तगी की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही, नियोजन अभिलेखों में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा जरूरत पड़ने पर नियमावली में संशोधन सहित अन्य वैधानिक उपाय करने का भी आग्रह किया।

तेजस्वी यादव ने कहा कि हजारों शिक्षक परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में है। सरकार को मानवीय, न्यायिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार करते हुए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो।