नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन चक्र-6 के तहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर आठ हो गई है। सीबीआई का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से डिजिटल अरेस्ट ठगी के पीछे सक्रिय संगठित नेटवर्क का खुलासा करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
सीबीआई ने बताया कि यह कार्रवाई देशभर में फैले डिजिटल अरेस्ट गिरोहों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। जांच एजेंसी ने इससे पहले भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में देश के 20 राज्यों में 89 स्थानों पर समन्वित छापेमारी अभियान चलाया था। अदालत ने डिजिटल अरेस्ट अपराधों की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई थी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
सीबीआई के अनुसार, कार्रवाई जिन तीन प्रमुख मामलों से जुड़ी है, उनमें पहला मामला बीआईटीएस पिलानी का है, जहां एक पीड़ित को तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर ठगों ने 7.67 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी।
दूसरा मामला गुजरात का है, जहां पीड़ित को तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 19.24 करोड़ रुपए की ठगी की गई। वहीं तीसरा मामला कर्नाटक का है, जिसमें एक व्यक्ति को एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 15.45 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई थी।
इन मामलों में पहले सीबीआई ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें हरियाणा का आकाश, कोलकाता का राजा करमाकर और ज्योति रानी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि इन लोगों ने ठगी की रकम को विभिन्न बैंक खातों के जरिए प्राप्त कर आगे स्थानांतरित किया तथा धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में सक्रिय भूमिका निभाई।
ताजा कार्रवाई में सीबीआई ने संकेत बस्तवार और पंकज दमाडे (दोनों इटारसी निवासी) को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार दोनों ने धोखे से प्राप्त बैंक खाते का उपयोग कर डिजिटल अरेस्ट से प्राप्त ठगी की रकम हासिल की और उसे विभिन्न खातों में भेजकर उसकी ट्रैकिंग मुश्किल बनाने का प्रयास किया।
इसके अलावा आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी (नई दिल्ली) और शशांक सिंह उर्फ रवि (गाजियाबाद) को भी गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे कई खातों में स्थानांतरित करने के लिए बैंक खातों की व्यवस्था की।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरिफ, हैरी और शशांक ने बैंक खाता धारक के मोबाइल फोन में एक दुर्भावनापूर्ण एपीके (एपीके) फाइल इंस्टॉल की थी। इसके जरिए वे बैंक से आने वाले एसएमएस अलर्ट को इंटरसेप्ट कर खाते का गुप्त रूप से संचालन करते थे। सीबीआई का मानना है कि आरोपियों के पीछे एक बड़ा और संगठित साइबर अपराध नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी पड़ताल की जा रही है।
सीबीआई ने कहा कि गिरफ्तारियों के बाद जांच अब पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली, धन के प्रवाह और अन्य सहयोगियों की पहचान पर केंद्रित है। एजेंसी शेष फरार आरोपियों की तलाश में भी जुटी हुई है।
