ओवरथिंकिंग बन सकती है मानसिक तनाव की वजह, दिमाग को शांत रखने के अपनाएं ये असरदार तरीके

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नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचने की आदत तेजी से आम होती जा रही है। कई लोग किसी एक घटना, बातचीत या चिंता में इस कदर उलझ जाते हैं कि उनका मन बार-बार उसी बात पर अटक जाता है। कभी बीती गलतियों का पछतावा परेशान करता है, तो कभी भविष्य को लेकर डर और असमंजस मन पर हावी हो जाता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार जरूरत से ज्यादा सोचते रहना मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार नकारात्मक विचारों में उलझे रहने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है और तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्तर भी अधिक हो सकता है, जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करने लगता है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, किसी बात के बारे में सामान्य रूप से सोचना गलत नहीं है, लेकिन जब इंसान हर स्थिति को जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है, तब यह आदत मानसिक परेशानी का रूप ले सकती है। कई रिसर्च में पाया गया है कि ओवरथिंकिंग करने वाले लोग अक्सर चिंता, बेचैनी और तनाव का ज्यादा सामना करते हैं। इसका असर धीरे-धीरे उनके व्यवहार, रिश्तों और काम करने की क्षमता पर भी दिखाई देने लगता है।

दिमाग को लगातार खाली छोड़ना भी ओवरथिंकिंग को बढ़ा सकता है। रिसर्च बताती है कि जब इंसान के पास करने के लिए कोई काम नहीं होता, तो दिमाग खुद ही पुरानी बातों और नकारात्मक विचारों में उलझने लगता है। यही वजह है कि डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक खुद को किसी रचनात्मक काम में व्यस्त रखने की सलाह देते हैं। किताब पढ़ना, संगीत सुनना, टहलना, एक्सरसाइज करना या कोई नई चीज सीखना दिमाग को सकारात्मक दिशा देने में मदद कर सकता है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ओवरथिंकिंग की सबसे बड़ी वजह अक्सर बीते समय या आने वाले कल की चिंता होती है। कई लोग पुरानी गलतियों को बार-बार याद करते रहते हैं, जबकि कुछ लोग भविष्य को लेकर इतना सोचते हैं कि वर्तमान का आनंद ही नहीं ले पाते। जो लोग वर्तमान में जीने की आदत डालते हैं, उनमें तनाव और चिंता का स्तर कम देखा गया है।

डॉक्टरों का मानना है कि हर छोटी बात को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से लेना भी मानसिक दबाव को बढ़ा सकता है। कई बार लोग दूसरों की बातों का गलत मतलब निकाल लेते हैं और फिर उसी के बारे में घंटों सोचते रहते हैं। हर बात को व्यक्तिगत रूप से लेना मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग छोटी बातों को छोड़ना सीख जाते हैं, उनमें तनाव कम होता है।

मन में चल रही बातों को दबाकर रखने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करना फायदेमंद हो सकता है। रिसर्च बताती है कि जब इंसान अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करता है, तो उसका मानसिक दबाव कम होने लगता है। इससे मानसिक राहत मिलती हैं।

योग और मेडिटेशन को भी मानसिक शांति के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि रोज कुछ मिनट गहरी सांस लेने और ध्यान लगाने से दिमाग की गतिविधियां संतुलित होती हैं। इससे तनाव कम होता है और इंसान की सोचने-समझने की क्षमता बेहतर हो सकती है।